“मुख में राम, बगल में छुरी”, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गौ हत्या और ‘बीफ’ निर्यात पर उठाए सवाल
वाराणसी। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बुधवार को वाराणसी में आयोजित गौ रक्षार्थ धर्मयुद्ध यात्रा के दौरान छद्म हिंदुत्व और गौ हत्या के मुद्दे पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आज सबसे बड़ा धर्म कार्य “कालनेमि को पहचानना” है, क्योंकि वर्तमान समय में धर्म के नाम पर छल करने वाले लोग हिंदू वेश धारण कर समाज को भ्रमित कर रहे हैं।
81 दिवसीय ‘गविष्टि (गौरक्षार्थ धर्मयुद्ध)’ यात्रा के 11वें दिन ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी के अवसर पर शंकराचार्य ने वाराणसी जिले की छह विधानसभाओं में जनसभाओं को संबोधित किया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने वैदिक मंत्र “अहं हन्मि वृत्रं गविष्टौ” का सामूहिक उच्चारण करते हुए गौ रक्षा का संकल्प लिया।
“धार्मिक वेश धारण कर समाज को भ्रमित किया जा रहा”
अपने प्रवचन में शंकराचार्य ने कहा कि पहले के आक्रमणों में शत्रु की पहचान स्पष्ट होती थी, लेकिन अब आक्रमणकारी ने हिंदू धर्म का वेश धारण कर लिया है। उन्होंने कहा कि माथे पर तिलक, गले में भगवा और मुख में “जय श्रीराम” का नारा लगाने वाले कुछ लोग भीतर से गौ हत्या और मांस भक्षण का समर्थन कर रहे हैं। यही वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौती है।
उन्होंने रामायण का उदाहरण देते हुए कहा कि रावण ने युद्ध के समय अपने राक्षसों को तिलक और माला पहनाकर राम सेना में भ्रम पैदा किया था। इसी तरह आज भी “कालनेमि” साधु और धार्मिक व्यक्ति का रूप धारण कर धर्म को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं।
‘बीफ’ निर्यात और गौ हत्या पर उठाए सवाल
शंकराचार्य ने ‘बीफ’ निर्यात के मुद्दे पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि गाय और भैंस के मांस को एक ही नाम ‘बीफ’ देना संदेह पैदा करता है। उन्होंने दावा किया कि कई मामलों में प्रयोगशाला जांच में गाय के मांस की पुष्टि हुई है। साथ ही भोपाल के एक सरकारी स्लॉटरहाउस का भी उल्लेख करते हुए गौ हत्या के मामलों पर चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि गौ हत्या केवल धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक और नैतिक अपराध भी है। शास्त्रों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि गौ हत्या के पाप में केवल हत्या करने वाला ही नहीं, बल्कि अनुमति देने वाला, खरीदने-बेचने वाला और उसका उपभोग करने वाला भी सहभागी होता है।
नेताओं पर भी साधा निशाना
प्रवचन के दौरान शंकराचार्य ने कुछ राजनीतिक नेताओं पर भी अप्रत्यक्ष हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो लोग सार्वजनिक रूप से धार्मिक प्रतीकों का उपयोग करते हैं और दूसरी ओर मांस भक्षण को बढ़ावा देते हैं, वे धर्म को बदनाम कर रहे हैं। उन्होंने “मुख में राम, बगल में छुरी” कहावत का उल्लेख करते हुए लोगों से ऐसे व्यक्तियों से सतर्क रहने की अपील की।
“एक वोट, एक नोट” अभियान की घोषणा
रोहनिया विधानसभा क्षेत्र में शंकराचार्य ने गौधाम निर्माण के लिए “एक वोट, एक नोट” अभियान की घोषणा की। इसके तहत लोगों से ₹1 से ₹500 तक का सहयोग देने की अपील की गई। उन्होंने कहा कि गौधाम में गायों को “दूध देने के लिए नहीं, बल्कि आशीर्वाद देने के लिए” रखा जाएगा।
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि 81 दिवसीय यात्रा के समाप्त होने तक सरकार ने गौ रक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाए, तो 24 जुलाई को लखनऊ में अगले चरण के आंदोलन की घोषणा की जाएगी।

