संसद में संत वेशभूषा पहनकर प्रदर्शन का मामला, वाराणसी में राहुल गांधी, अवधेश प्रसाद और पप्पू यादव के खिलाफ मुकदमा

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वाराणसी। संसद परिसर में संत वेशभूषा धारण कर किए गए राजनीतिक प्रदर्शन का विवाद अब धर्मनगरी काशी तक पहुंच गया है। शनिवार को पातालपुरी मठ के पीठाधीश्वर एवं जगद्गुरु महंत बालक देवाचार्य (बालक दास) के नेतृत्व में संत समाज के एक प्रतिनिधिमंडल ने कोतवाली थाने पहुंचकर सांसद पप्पू यादव, राहुल गांधी, डिंपल यादव, अवधेश प्रसाद सहित प्रदर्शन में शामिल अन्य नेताओं के खिलाफ तहरीर दी। संत समाज ने आरोप लगाया कि संसद जैसे सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच पर संतों की वेशभूषा का राजनीतिक प्रदर्शन में इस्तेमाल कर धार्मिक भावनाओं को आहत किया गया है और संत परंपरा की गरिमा को ठेस पहुंची है।

महंत बालक देवाचार्य ने कहा कि संत समाज सदैव राष्ट्र, धर्म और समाज के कल्याण के लिए कार्य करता रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद में राम मंदिर के चढ़ावे के मुद्दे पर विरोध दर्ज कराने के लिए संतों का वेश धारण करना केवल राजनीतिक स्वांग था, जिससे पूरे संत समाज की छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध दर्ज कराने के अनेक संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके उपलब्ध हैं, लेकिन धार्मिक प्रतीकों और संत वेशभूषा का राजनीतिक उद्देश्य से उपयोग करना अनुचित और निंदनीय है।

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संत समाज ने अपनी तहरीर में संबंधित नेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के साथ-साथ सांसद पप्पू यादव की संसद सदस्यता समाप्त किए जाने की भी मांग उठाई। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि इस घटना से करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों की आस्था प्रभावित हुई है, इसलिए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई आवश्यक है। तहरीर देने के दौरान बड़ी संख्या में साधु-संत और समर्थक कोतवाली थाने पहुंचे और शांतिपूर्ण ढंग से अपना विरोध दर्ज कराया। 

पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस प्रशासन भी सतर्क रहा। काशी जोन के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) गौरव बंसवाल ने बताया कि संत समाज के प्रतिनिधिमंडल से प्राप्त तहरीर के आधार पर कोतवाली थाने में संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि मामले की विधिक प्रक्रिया के अनुसार जांच की जाएगी तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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