जरीदार वस्त्रों से राधारानी का हुआ दिव्य श्रृंगार, 108 व्यंजनों का लगा भोग
दुर्गाकुंड इस्कॉन मंदिर में धूमधाम से मना जन्मोत्सव, हजारों श्रद्धालुओं ने किए राधा-कृष्ण के दर्शन
महाअभिषेक, पालना उत्सव और हरिनाम संकीर्तन से भक्तिमय हुआ मंदिर परिसर
मथुरा से मंगाए गए जरीदार वस्त्र और आभूषण, सुगंधित फूलों और पवित्र द्रव्यों से श्रीराधा-कृष्ण का महाअभिषेक
पालना उत्सव, भजन-कीर्तन और हरिनाम संकीर्तन में शामिल हुए श्रद्धालु, 108 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाने के बाद महाप्रसाद का वितरण
वाराणसी। दुर्गाकुंड स्थित इस्कॉन मंदिर में शनिवार, 19 सितंबर को श्रीराधाष्टमी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। राधारानी के जन्मोत्सव पर मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया गया। सुबह से ही दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी। हजारों भक्तों ने राधा-कृष्ण के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। दिनभर भजन-कीर्तन, हरिनाम संकीर्तन और राधे-राधे के जयकारों से मंदिर परिसर गूंजता रहा।

मथुरा से आए जरीदार वस्त्रों से हुआ श्रृंगार
राधाष्टमी पर राधारानी का विशेष श्रृंगार किया गया। मथुरा से मंगाए गए जरीदार वस्त्रों और आकर्षक आभूषणों से राधारानी को सजाया गया। उनका मनोहारी स्वरूप श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा। भक्तों ने पुष्प अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की।

सुगंधित फूलों और पवित्र द्रव्यों से महाअभिषेक
महोत्सव के दौरान श्रीराधा-कृष्ण का सुगंधित फूलों और विभिन्न पवित्र द्रव्यों से विधि-विधानपूर्वक महाअभिषेक किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार और भक्ति गीतों के बीच हुए अनुष्ठान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। इसके बाद विशेष पूजन और आरती की गई।

पालना उत्सव में झूमे श्रद्धालु
फूलों और सजावटी सामग्री से सजे पालने में राधारानी को विराजमान कराया गया। श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक पालना झुलाया। इस दौरान मंदिर में हरिनाम संकीर्तन और राधा-कृष्ण के जयकारे गूंजते रहे।

108 व्यंजनों का लगाया भोग
राधाष्टमी पर श्रीराधा-कृष्ण को 108 प्रकार के व्यंजनों का भोग अर्पित किया गया। विभिन्न पकवानों को आकर्षक ढंग से सजाकर भगवान को समर्पित किया गया। पूजन के बाद श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद वितरित किया गया।

राधारानी प्रेम-भक्ति का स्वरूप : अच्युत मोहन दास
इस्कॉन मंदिर के अध्यक्ष अच्युत मोहन दास ने कहा कि श्रीराधारानी भगवान श्रीकृष्ण की आनंददायिनी शक्ति और प्रेम-भक्ति का स्वरूप हैं। राधाष्टमी भक्तों के लिए उनके चरणों में शरणागति और भक्ति की भावना को मजबूत करने का विशेष अवसर है। राधारानी की भक्ति से भगवान श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम और समर्पण की भावना गहरी होती है। राधाष्टमी पर वाराणसी के अन्य कृष्ण मंदिरों, मठों और आश्रमों में भी विशेष आयोजन किए गए। राधारानी की झांकियां सजाई गईं और पालना उत्सव के साथ भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ।
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