रसोई गैस की सप्लाई पर उठे सवाल, कम वजन के सिलेंडर और देरी से डिलीवरी के आरोप, बेनीपुर गैस एजेंसी का मामला, जांच और कार्रवाई की मांग 

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वाराणसी। बेनीपुर गैस एजेंसी से जुड़े रसोई गैस सिलेंडरों की आपूर्ति को लेकर उपभोक्ताओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है। उपभोक्ताओं ने एजेंसी के डिलीवरी कर्मी सुरेश कुमार गुप्ता पर सिलेंडरों में कथित रूप से कम गैस पहुंचाने और बुकिंग के बाद समय पर आपूर्ति नहीं करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। लोगों का दावा है कि कुछ उपभोक्ताओं को निर्धारित मात्रा से करीब दो से तीन किलो तक कम गैस वाले सिलेंडर मिले हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

उपभोक्ताओं का कहना है कि गैस एजेंसी से सिलेंडर उठाने के बाद उसकी आपूर्ति घर-घर की जाती है। आरोप है कि इसी दौरान कुछ सिलेंडरों में कथित रूप से हेराफेरी की जाती है। लोगों ने आशंका जताई कि सिलेंडरों से गैस निकालकर दूसरे सिलेंडरों में भरी जाती है और कम वजन वाले सिलेंडर उपभोक्ताओं को दे दिए जाते हैं। उपभोक्ताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सिलेंडरों की मौके पर तौल कराने की मांग की है।

दो से तीन किलो तक कम गैस का आरोप
कई उपभोक्ताओं का आरोप है कि उनके घर पहुंचने वाले सिलेंडर अपेक्षित अवधि से पहले ही खत्म हो जाते हैं। लोगों का कहना है कि कुछ सिलेंडरों में दो से तीन किलो तक गैस कम होने की आशंका है। कुछ उपभोक्ताओं ने यह भी बताया कि सिलेंडर समाप्त होने के पहले ही गैस की लौ में बदलाव और चूल्हे से काला धुआं निकलने जैसी समस्याएं महसूस होती हैं।

उपभोक्ताओं का कहना है कि निर्धारित कीमत चुकाने के बाद उन्हें निर्धारित मात्रा में गैस मिलनी चाहिए। ऐसे में सिलेंडर के वजन की जांच ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट कर सकती है। लोगों ने संबंधित अधिकारियों से डिलीवरी के दौरान वजन जांच की व्यवस्था प्रभावी बनाने की मांग की है।

मिर्जामुराद में भी सप्लाई को लेकर शिकायत
स्थानीय लोगों के मुताबिक, मिर्जामुराद क्षेत्र में गणेश मंदिर के पास भी उक्त डिलीवरी कर्मी द्वारा गैस सिलेंडरों की आपूर्ति की जाती है। यहां के कुछ उपभोक्ताओं ने भी कम गैस वाले सिलेंडर मिलने की शिकायत का दावा किया है। इससे क्षेत्र में नाराजगी बढ़ने की बात कही जा रही है।
आरोपों के संबंध में जब डिलीवरी कर्मी सुरेश कुमार गुप्ता से पूछताछ की गई तो उनके कथित जवाब से भी उपभोक्ता असंतुष्ट बताए जा रहे हैं। हालांकि, सिलेंडरों में गैस की कथित कमी या रिफिलिंग संबंधी आरोपों की पुष्टि संबंधित विभाग की जांच और वजन परीक्षण के बाद ही हो सकेगी।

बुकिंग के बाद कई दिन तक इंतजार
उपभोक्ताओं की दूसरी प्रमुख शिकायत सिलेंडर की समय पर डिलीवरी को लेकर है। लोगों का आरोप है कि बुकिंग कराने के बाद सिलेंडर पहुंचने में दो-तीन दिन से लेकर कभी-कभी एक सप्ताह तक का समय लग जाता है। इस दौरान उपभोक्ताओं को डिलीवरी कर्मी से बार-बार संपर्क करना पड़ता है।

लोगों का कहना है कि कई बार फोन करने के बावजूद कॉल रिसीव नहीं होती। कुछ मामलों में घर पर सिलेंडर पहुंचाने का आश्वासन देकर बाद में डिलीवरी नहीं की जाती। इससे विशेषकर बुजुर्गों और ऐसे परिवारों को परेशानी होती है, जिनके पास खाना पकाने के लिए गैस का कोई वैकल्पिक साधन नहीं है।

डीएससी नंबर लेने के बाद भी डिलीवरी नहीं होने का आरोप
कुछ उपभोक्ताओं ने डीएससी नंबर से जुड़ी शिकायत भी सामने रखी है। उनका आरोप है कि डिलीवरी कर्मी डीएससी नंबर लेकर एजेंसी से सिलेंडर उठा लेते हैं, लेकिन कई बार सिलेंडर उनके घर तक नहीं पहुंचता। कुछ लोगों का कहना है कि बाद में उन्हें दोबारा गैस बुक कराने और डीएससी नंबर देने के लिए कहा जाता है।

उपभोक्ताओं ने मांग की है कि एजेंसी के रिकॉर्ड, डिलीवरी विवरण और डिजिटल एंट्री की जांच की जाए। इससे यह स्पष्ट हो सकता है कि किसी उपभोक्ता के नाम पर सिलेंडर जारी होने के बावजूद उसकी वास्तविक डिलीवरी हुई या नहीं।

जांच के बाद कार्रवाई की मांग
लगातार सामने आ रही शिकायतों को लेकर उपभोक्ताओं ने गैस एजेंसी और संबंधित विभागीय अधिकारियों से मामले की जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि एजेंसी से लेकर उपभोक्ता के घर तक सिलेंडर पहुंचने की पूरी प्रक्रिया की जांच होनी चाहिए। साथ ही शिकायत करने वाले उपभोक्ताओं के सिलेंडरों का वजन कराकर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए।

 

उपभोक्ताओं ने मांग की है कि यदि जांच में कम वजन, अनियमित डिलीवरी या अन्य आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित डिलीवरी कर्मी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए और आवश्यकता पड़ने पर उसे वितरण कार्य से हटाया जाए। लोगों का कहना है कि रसोई गैस रोजमर्रा की जरूरत की आवश्यक वस्तु है। इसकी आपूर्ति में पारदर्शिता और समयबद्धता बेहद जरूरी है। उपभोक्ताओं ने संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, डिलीवरी व्यवस्था में सुधार करने और गैस सिलेंडरों की नियमित वजन जांच सुनिश्चित करने की मांग की है।

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