IMS BHU में आध्यात्मिक कार्यक्रम पर उठे सवाल, शिवकथा को लेकर प्रो. ओमशंकर ने जताई आपत्ति
19 से 21 अगस्त तक मेडिकल छात्रों की ओर से प्रस्तावित हैं कार्यक्रम, केएन उडुप्पा सभागार में चल रही तैयारियां
वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान (आईएमएस बीएचयू) में 19 से 21 अगस्त तक मेडिकल छात्रों की ओर से प्रस्तावित आध्यात्मिक कार्यक्रम को लेकर परिसर में चर्चा तेज हो गई है। कार्यक्रम के तहत श्रीरामचरित मानस पर आधारित शिवकथा समेत विभिन्न आध्यात्मिक गतिविधियां आयोजित की जानी हैं। इसके लिए संस्थान के केएन उडुप्पा सभागार में तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसी बीच हृदय रोग विभाग के प्रो. ओमशंकर ने संस्थान परिसर में धार्मिक-आध्यात्मिक आयोजन को लेकर सार्वजनिक रूप से आपत्ति जताई है।
तीन दिन चलेगा कार्यक्रम
मेडिकल छात्रों की ओर से प्रस्तावित यह आयोजन 19 से 21 अगस्त तक चलेगा। इसके लिए केएन उडुप्पा सभागार निर्धारित किया गया है। आयोजन से जुड़े छात्रों के अनुसार कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विषयों से जोड़ना है। श्रीरामचरित मानस पर आधारित शिवकथा कार्यक्रम का प्रमुख हिस्सा बताई जा रही है। सभागार में आयोजन को लेकर आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
आयोजन को लेकर छात्रों में उत्साह है, लेकिन संस्थान परिसर में धार्मिक कार्यक्रम के आयोजन को लेकर अब सवाल भी उठने लगे हैं। मामले में प्रो. ओमशंकर की सार्वजनिक आपत्ति के बाद यह मुद्दा चर्चा में आ गया है।
फेसबुक पोस्ट के जरिए जताई आपत्ति
आईएमएस बीएचयू के हृदय रोग विभाग के प्रो. ओमशंकर ने अपने फेसबुक पेज पर पोस्ट के माध्यम से कार्यक्रम को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति या विद्यार्थियों के समूह की धार्मिक आस्था पर सवाल उठाना उचित नहीं है। प्रत्येक विद्यार्थी, शिक्षक और कर्मचारी को अपनी धार्मिक मान्यताओं का पालन करने और अपनी इच्छा से धार्मिक गतिविधियों में शामिल होने का अधिकार है।
हालांकि, उन्होंने व्यक्तिगत धार्मिक स्वतंत्रता और संस्थागत गतिविधियों के बीच अंतर को महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार विवाद किसी धर्म या शिवकथा को लेकर नहीं, बल्कि सार्वजनिक और सरकारी वित्त पोषित संस्थान के आधिकारिक परिसर, संसाधनों तथा संस्थागत पहचान के इस्तेमाल से जुड़ा है।
‘व्यक्तिगत आस्था और संस्थागत गतिविधि अलग’
प्रो. ओमशंकर ने अपनी आपत्ति को व्यक्तिगत धार्मिक विचारों के बजाय संस्थागत व्यवस्था से जोड़ते हुए कहा कि विद्यार्थियों और कर्मचारियों की निजी आस्था का सम्मान होना चाहिए। लेकिन जब कोई धार्मिक या आध्यात्मिक आयोजन किसी सार्वजनिक शिक्षण एवं चिकित्सा संस्थान के आधिकारिक परिसर में होता है, तब उसके स्वरूप और संस्थागत संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। उनका तर्क है कि व्यक्तिगत धार्मिक स्वतंत्रता और सार्वजनिक संस्थान की संस्थागत पहचान के बीच स्पष्ट सीमा बनाए रखना आवश्यक है।
छात्रों की धार्मिक स्वतंत्रता का किया समर्थन
प्रो. ओमशंकर की आपत्ति में विद्यार्थियों की धार्मिक स्वतंत्रता का भी समर्थन किया गया है। उन्होंने कहा कि किसी छात्र या शिक्षक को अपनी धार्मिक मान्यता रखने, पूजा-अर्चना करने अथवा स्वेच्छा से धार्मिक गतिविधियों में शामिल होने से रोका नहीं जाना चाहिए। ऐसे में उनका विरोध छात्रों की व्यक्तिगत आस्था के खिलाफ नहीं है।
उनके मुताबिक मुख्य सवाल यह है कि संस्थान के आधिकारिक परिसर में किसी धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किस व्यवस्था के तहत किया जा रहा है और उसमें संस्थागत संसाधनों की क्या भूमिका है।
प्रशासन की भूमिका पर निगाह
मामला सामने आने के बाद अब आईएमएस बीएचयू प्रशासन की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। एक ओर छात्र आयोजन की तैयारियों में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर शिक्षक की आपत्ति के बाद परिसर में धार्मिक-आध्यात्मिक कार्यक्रमों के आयोजन से जुड़े नियमों पर चर्चा शुरू हो गई है।
आईएमएस बीएचयू चिकित्सा शिक्षा, प्रशिक्षण और मरीजों के उपचार से जुड़ा प्रमुख संस्थान है। ऐसे में परिसर में होने वाली गतिविधियों को लेकर छात्रों की व्यक्तिगत आस्था, धार्मिक स्वतंत्रता और संस्थान की संस्थागत मर्यादा के बीच संतुलन का सवाल सामने आया है।
फिलहाल 19 से 21 अगस्त तक प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर तैयारियां जारी हैं। वहीं प्रो. ओमशंकर की आपत्ति के बाद अब संस्थान प्रशासन की स्थिति पर सभी की निगाहें टिकी हैं। कार्यक्रम को लेकर छात्रों और शिक्षकों के अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आने के बीच प्रशासन की ओर से नियमों और आयोजन की स्थिति पर स्पष्टता दिए जाने को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

