आईएमएस-बीएचयू की आउटसोर्सिंग भर्ती पर उठे सवाल, पीएम ग्रीवांस पोर्टल ने कुलसचिव को सौंपी जांच

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वाराणसी। बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान (आईएमएस) में आउटसोर्सिंग के माध्यम से की गई 26 पदों की भर्ती अब जांच के दायरे में आ गई है। भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और पक्षपात के आरोपों को लेकर दर्ज शिकायत प्रधानमंत्री जन शिकायत (पीएम ग्रीवांस) पोर्टल तक पहुंच गई है। मामले को गंभीर मानते हुए पोर्टल ने शिकायत को ‘इम्पैक्ट’ श्रेणी में स्वीकार किया है और जांच के लिए बीएचयू के कुलसचिव को भेज दिया है।

आईएमएस-बीएचयू में हाल ही में कंप्यूटर स्किल वर्कर, कंप्यूटर प्रोफेशनल, एसी मैकेनिक, बॉडी लिफ्टर, ऑडियोमेट्री एवं स्पीच थेरेपी, ओटी टेक्नीशियन, दाई, एमटीएस और सोशल वर्कर सहित विभिन्न श्रेणियों के कुल 26 पदों पर आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्तियां की गई थीं। इन नियुक्तियों को लेकर भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए हैं।

बताया जाता है कि 11 जून को इस संबंध में बीएचयू के कुलपति को शिकायत भेजी गई थी। इसके बाद 12 जून को प्रधानमंत्री जन शिकायत पोर्टल पर विस्तृत शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि चयन प्रक्रिया में निर्धारित नियमों और पात्रता मानकों की अनदेखी की गई तथा कुछ अभ्यर्थियों को विशेष लाभ पहुंचाया गया।

शिकायत में कई गंभीर आरोप शामिल हैं। इनमें एक ही परिवार के तीन सदस्यों का चयन प्रमुख है, जिसमें एक भाई और दो बहनों को नियुक्ति दिए जाने की बात कही गई है। आरोप है कि दोनों बहनों का चयन कंप्यूटर प्रोफेशनल पद पर किया गया। इसके अलावा कंप्यूटर डिप्लोमा धारक अभ्यर्थी को ऑडियोमेट्री एवं स्पीच थेरेपी जैसे विशेष तकनीकी पद पर नियुक्त किए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि कई चयनित अभ्यर्थियों ने चांदपुर (लोहता) स्थित एक ही निजी कंप्यूटर संस्थान के डिप्लोमा प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए हैं, जिससे प्रमाणपत्रों की वैधता और चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर संदेह उत्पन्न हुआ है। इसके अलावा एसी मैकेनिक और एमटीएस पदों पर ऐसे अभ्यर्थियों के चयन का आरोप लगाया गया है, जो योग्यता परीक्षा में ग्रेस मार्क्स के आधार पर उत्तीर्ण हुए थे। कुछ मामलों में असफल अभ्यर्थियों के चयन की भी शिकायत की गई है।

एमटीएस और सोशल वर्कर पदों पर निर्धारित अधिकतम आयु सीमा से अधिक उम्र के अभ्यर्थियों की नियुक्ति का आरोप भी शिकायत में शामिल है। इन सभी बिंदुओं को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। पीएम ग्रीवांस पोर्टल से जांच के निर्देश मिलने के बाद अब विश्वविद्यालय स्तर पर पूरे भर्ती प्रकरण की समीक्षा की तैयारी शुरू हो गई है। सूत्रों के अनुसार यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही विवादित नियुक्तियों की भी पुनः समीक्षा होने की संभावना है। फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की अगली कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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