बीएचयू में अंबेडकर चेयर नियुक्ति पर उठे सवाल, 97 शिक्षकों को भेजी गई विस्तृत शिकायत
वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में डॉ. भीमराव आंबेडकर चेयर प्रोफेसर की नियुक्ति को लेकर नया विवाद सामने आया है। नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता और अभ्यर्थी की योग्यता से जुड़े कथित आरोपों ने विश्वविद्यालय के शैक्षणिक माहौल में चर्चा का विषय बना दिया है। मामले को लेकर हरियाणा के करनाल स्थित दयाल सिंह महाविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. पवन कुमार ने बीएचयू के 97 प्रोफेसरों को एक विस्तृत ई-मेल भेजकर शिकायत दर्ज कराई है।
शिकायती ई-मेल में नियुक्ति प्रक्रिया से संबंधित कई बिंदुओं पर प्रश्न उठाए गए हैं। डॉ. पवन कुमार ने दावा किया है कि संबंधित अभ्यर्थी ने अपनी नियुक्ति के लिए प्रस्तुत किए गए कुछ दस्तावेजों और योग्यताओं के संबंध में तथ्यों को सही ढंग से प्रस्तुत नहीं किया। उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में विभिन्न दस्तावेजों का उल्लेख करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
ई-मेल में यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित अभ्यर्थी ने वर्ष 2011-12 के दौरान भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर) की फेलोशिप प्राप्त की थी, जबकि उसी अवधि में वर्ष 2012 में झारखंड के एक केंद्रीय विश्वविद्यालय में गेस्ट फैकल्टी के रूप में भी कार्य किया। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस दौरान दोनों स्रोतों से लाभ प्राप्त किए जाने की स्थिति की जांच आवश्यक है।
इसके अतिरिक्त शिकायत में यह भी कहा गया है कि फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के समक्ष कुछ तथ्यों को कथित रूप से गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। साथ ही दावा किया गया है कि आईसीएसएसआर द्वारा जारी 30 सितंबर 2015 के एक प्रमाण पत्र को बाद में 26 दिसंबर 2023 को वापस ले लिया गया था।
शिकायत में हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले में दर्ज एक कथित धोखाधड़ी मामले का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें 4 मार्च 2024 को प्राथमिकी दर्ज होने की बात कही गई है। डॉ. पवन कुमार ने अपने ई-मेल के साथ कई दस्तावेज संलग्न करते हुए विश्वविद्यालय के शिक्षकों से मामले पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है। हालांकि, इस पूरे प्रकरण पर बीएचयू प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों ने विश्वविद्यालय में नई बहस को जन्म दे दिया है।

