लखनऊ में वकीलों पर लाठीचार्ज के विरोध में वाराणसी में उग्र प्रदर्शन, न्यायिक कार्य ठप
वाराणसी। राजधानी लखनऊ में अधिवक्ताओं पर हुए कथित लाठीचार्ज और चैम्बर्स में तोड़फोड़ की घटना के विरोध में वाराणसी के अधिवक्ताओं का आक्रोश सोमवार को खुलकर सामने आया। घटना के विरोध में सेंट्रल बार एसोसिएशन और बनारस बार एसोसिएशन की संयुक्त बैठक आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने हिस्सा लिया। बैठक में सर्वसम्मति से पूरे दिन न्यायिक कार्य का पूर्ण बहिष्कार करने का निर्णय लिया गया। इसके चलते कचहरी परिसर में न्यायिक गतिविधियां प्रभावित रहीं और कई मामलों की सुनवाई भी टल गई।
बैठक के दौरान अधिवक्ताओं ने लखनऊ में हुई घटना को लोकतंत्र और न्यायपालिका से जुड़े लोगों के सम्मान पर सीधा हमला बताया। वक्ताओं ने कहा कि जिस प्रकार पुलिस द्वारा वकीलों पर बल प्रयोग किया गया और उनके चैम्बर्स में तोड़फोड़ की गई, उससे पूरे प्रदेश के अधिवक्ता समुदाय में भारी रोष व्याप्त है। अधिवक्ताओं ने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए सरकार और प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किए।
बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने प्रशासन के समक्ष कई मांगें रखीं। उन्होंने कहा कि घटना के दोषी अधिकारियों और पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही घायल अधिवक्ताओं के समुचित इलाज की व्यवस्था सरकार अपने स्तर पर सुनिश्चित करे। जिन वकीलों के चैम्बर्स को नुकसान पहुंचा है, उन्हें उचित आर्थिक मुआवजा भी दिया जाए।
अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि बनारस बार और सेंट्रल बार एसोसिएशन लगातार लखनऊ बार समेत प्रदेश की अन्य बार एसोसिएशनों के संपर्क में हैं और आगे की रणनीति पर विचार किया जा रहा है। विरोध प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने एकजुटता दिखाते हुए कहा कि वकीलों के सम्मान और अधिकारों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

