आईएमएस-बीएचयू में पदोन्नति मामला: संशोधित सूची के बाद प्रमोशन पाए 39 नर्सिंग अधिकारी फिर मूल पद पर पहुंचे, प्रक्रिया पर उठे सवाल
वाराणसी। बीएचयू आयुर्विज्ञान संस्थान (आईएमएस) में नर्सिंग अधिकारियों की पदोन्नति को लेकर नया विवाद सामने आया है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी संशोधित पदोन्नति सूची के बाद 39 सीनियर नर्सिंग ऑफिसरों को पुनः नर्सिंग ऑफिसर के पद पर वापस कर दिया गया है। इस निर्णय से प्रभावित कर्मचारियों में नाराजगी व्याप्त है। उनका आरोप है कि कई महीनों तक सीनियर नर्सिंग ऑफिसर के रूप में कार्य कराने के बाद बिना किसी पूर्व सूचना, कारण बताओ नोटिस या स्पष्ट स्पष्टीकरण के उन्हें पदावनत कर दिया गया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।
प्रभावित नर्सिंग अधिकारियों ने इस पूरे मामले को मनमाना और प्रशासनिक त्रुटि का परिणाम बताते हुए बीएचयू के कुलपति, कुलसचिव, आईएमएस निदेशक तथा अन्य संबंधित अधिकारियों को लिखित शिकायत भेजी है। उनका कहना है कि यदि पदोन्नति प्रक्रिया में किसी प्रकार की गलती हुई थी, तो उसकी जिम्मेदारी प्रशासन की है, न कि उन कर्मचारियों की जिन्हें नियमानुसार पदोन्नति आदेश जारी कर कार्यभार सौंप दिया गया था। कर्मचारियों का कहना है कि इस फैसले से उनकी सेवा प्रतिष्ठा, मनोबल और भविष्य की पदोन्नति संभावनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

बीएचयू अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर में कार्यरत नर्सिंग अधिकारियों के लिए 3 जनवरी 2026 को कुलसचिव कार्यालय की ओर से पहली पदोन्नति सूची जारी की गई थी। इस सूची में कुल 195 नर्सिंग अधिकारियों को सीनियर नर्सिंग ऑफिसर के पद पर पदोन्नत किया गया था। पदोन्नति के बाद सभी संबंधित अधिकारियों ने अपने नए पद का कार्यभार भी संभाल लिया और कई महीनों तक उसी पद पर कार्य करते रहे।
हालांकि, पदोन्नति सूची जारी होने के कुछ समय बाद कुछ कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि पूरी प्रक्रिया में आरक्षण संबंधी नियमों और रोस्टर व्यवस्था का समुचित पालन नहीं किया गया है। इस संबंध में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग में शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत पर संज्ञान लेते हुए आयोग ने बीएचयू प्रशासन को आरक्षण नियमों के अनुरूप पूरी प्रक्रिया की समीक्षा करने और आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
आयोग के निर्देशों के अनुपालन में विश्वविद्यालय प्रशासन ने 27 मई 2026 को विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की दोबारा बैठक आयोजित की। समिति द्वारा पदोन्नति प्रक्रिया की समीक्षा किए जाने के बाद 22 जून 2026 को संशोधित पदोन्नति सूची जारी की गई। इस नई सूची में पहले पदोन्नत किए गए 39 कर्मचारियों के नाम हटा दिए गए, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें पुनः नर्सिंग ऑफिसर के पद पर भेज दिया गया। इस कार्रवाई के बाद प्रभावित कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा कराने, पदावनति के कारणों को सार्वजनिक करने और उन्हें न्याय दिलाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि प्रक्रिया में प्रशासनिक त्रुटि हुई थी तो उसका खामियाजा कर्मचारियों को नहीं भुगतना चाहिए।
वहीं, इस पूरे प्रकरण पर आईएमएस-बीएचयू के निदेशक प्रो. एस.एन. संखवार ने कहा कि उन्हें फिलहाल यह जानकारी नहीं है कि कितने कर्मचारियों का पदावनत किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि प्रभावित नर्सिंग अधिकारियों की ओर से कोई औपचारिक प्रत्यावेदन प्राप्त होता है, तो अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक से चर्चा कर नियमानुसार जो भी उचित होगा, उस पर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल यह मामला बीएचयू प्रशासन और नर्सिंग कर्मचारियों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। यदि शिकायतों का समाधान नहीं होता है, तो प्रभावित कर्मचारी कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर आगे की कार्रवाई करने पर भी विचार कर सकते हैं।

