वाराणसी को 'ग्रीन सिटी' बनाने की तैयारी तेज, एनजीटी सदस्य ने दिए कई अहम निर्देश
बैठक में डॉ. अफरोज अहमद ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित करते हुए कहा कि बायोमेडिकल वेस्ट के आंकलन और निगरानी के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी अस्पताल में 48 घंटे से अधिक समय तक बायोमेडिकल वेस्ट नहीं रहना चाहिए। साथ ही उन्होंने ई-वेस्ट के सुरक्षित निस्तारण पर भी जोर देते हुए उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को इस दिशा में ठोस कार्यवाही करने तथा आम लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए।

पर्यावरण संरक्षण के व्यापक दृष्टिकोण पर चर्चा करते हुए एनजीटी सदस्य ने सीवरेज के उपचारित पानी का उपयोग कृषि, बागवानी, लैंडस्केपिंग और निर्माण कार्यों में बढ़ाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि सीवरेज ट्रीटमेंट से जुड़े जिन क्षेत्रों में अभी भी कमी है, उनके लिए अग्रिम रूप से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार रखी जाए ताकि भविष्य में शत-प्रतिशत सीवेज निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके।
बैठक में वन संरक्षण और वृक्षारोपण को लेकर भी विशेष चर्चा हुई। डॉ. अफरोज अहमद ने वन विभाग को निर्देश दिया कि 100 से 200 वर्ष पुराने वृक्षों को संरक्षित रखने वाले लोगों को प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने किसानों को खेतों की मेड़ों पर पौधारोपण के लिए प्रेरित करने और एग्रो फॉरेस्ट्री को बढ़ावा देने पर जोर दिया। साथ ही गंगा नदी के किनारे बसे किसानों को कीटनाशकों के सीमित उपयोग, मेड़बंदी और वृक्षारोपण के प्रति जागरूक करने के निर्देश भी दिए गए।
उन्होंने कहा कि नदियों के संरक्षण के लिए उनके जलागम क्षेत्रों में अधिक से अधिक पौधारोपण आवश्यक है। इसके साथ ही बाढ़ क्षेत्र का चिन्हीकरण, नालों के किनारे बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण और भूजल पुनर्भरण के प्रभावी उपायों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि भूजल स्तर को क्रिटिकल जोन में जाने से रोकने के लिए सभी विभाग समन्वित प्रयास करें।
बैठक के दौरान ग्राम पंचायतों की सरकारी भूमि पर जैव विविधता वन विकसित करने की योजना पर भी चर्चा हुई। इसके तहत जामुन, अर्जुन और इमली जैसे स्थानीय एवं पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण पौधों के रोपण पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही पर्यावरण संरक्षण से जुड़े छोटे-बड़े कार्यों के लिए कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) फंड का उपयोग करने की भी सलाह दी गई।
डॉ. अफरोज अहमद ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण और अर्थव्यवस्था एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं तथा सतत विकास के लिए पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय और एनजीटी के सभी आदेशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।

बैठक में जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने जिले में अपशिष्ट प्रबंधन, नदी संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जा रहे विभिन्न कार्यों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। वहीं नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने नगर निगम क्षेत्र में डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण, कचरे के पृथक्करण और वैज्ञानिक तरीके से उसके निस्तारण की प्रगति से अवगत कराया। उन्होंने पुराने और अनुपचारित कचरे के सुरक्षित निपटान की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की भी जानकारी दी।
डॉ. अफरोज अहमद ने वाराणसी में पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों पर संतोष व्यक्त करते हुए जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की सराहना की। उन्होंने सभी अधिकारियों से समर्पित भाव से कार्य करते हुए बनारस को और अधिक स्वच्छ, हरित एवं सुंदर शहर बनाने का आह्वान किया।
बैठक के समापन पर डॉ. अफरोज अहमद ने सर्किट हाउस परिसर में सिंदूर का पौधा तथा जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने आम का पौधा रोपित कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी प्रखर कुमार सिंह, डीएफओ स्वाति सिंह, वाराणसी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पूर्ण बोहरा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

