दाल मंडी ध्वस्तीकरण के विरोध को लेकर सियासत तेज, सांसद वीरेंद्र सिंह बाबतपुर एयरपोर्ट पर रोके गए, गरमाई राजनीति
वाराणसी। दाल मंडी क्षेत्र में चल रहे ध्वस्तीकरण अभियान को लेकर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री Akhilesh Yadav के निर्देश पर गठित 11 सदस्यीय टीम के वाराणसी पहुंचने से पहले ही विवाद खड़ा हो गया। चंदौली के सांसद Virendra Singh को बाबतपुर एयरपोर्ट पर पुलिस प्रशासन ने रोक लिया। सांसद ने आरोप लगाया कि उन्हें बिना स्पष्ट कारण बताए नजरबंद किया गया।

अखिलेश यादव के निर्देश पर बनी थी जांच टीम
दाल मंडी में चल रहे ध्वस्तीकरण अभियान और दुकानदारों पर कथित अत्याचार के विरोध में समाजवादी पार्टी ने सक्रिय रुख अपनाया है। पार्टी की ओर से 11 सदस्यीय टीम गठित कर कार्यकर्ताओं को मौके पर जाकर हालात का जायजा लेने और प्रभावित लोगों से बातचीत करने के निर्देश दिए गए थे। इसी क्रम में सांसद वीरेंद्र सिंह वाराणसी पहुंचे थे।
एयरपोर्ट पर रोके जाने का आरोप
बाद में मीडिया से बात करते हुए सांसद वीरेंद्र सिंह ने मीडिया से बातचीत में बताया कि वे पिछले दो दिनों से दिल्ली में डिफेंस मीटिंग की स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में शामिल थे। बैठक समाप्त होने के बाद वे वाराणसी के लिए रवाना हुए।
उन्होंने कहा कि जैसे ही वे बाबतपुर एयरपोर्ट पहुंचे, पुलिस प्रशासन ने उन्हें रोक लिया। उनके मुताबिक, समाजवादी पार्टी के एमएलसी आशुतोष भी लखनऊ से वाराणसी आ रहे थे, जिन्हें बाबतपुर चौकी पर बैठा दिया गया, जबकि उन्हें एयरपोर्ट पर ही हिरासत में ले लिया गया।
“बिना कारण बताए गिरफ्तारी स्वीकार नहीं”
सांसद ने स्पष्ट कहा कि वे बिना कारण बताए गिरफ्तारी स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने पुलिस से आग्रह किया कि यदि थाने ले जाना है तो पुलिस की गाड़ी से ले जाया जाए।
वीरेंद्र सिंह के अनुसार, उन्होंने प्रशासन से यह भी कहा कि बिना मुचलका और लिखित कारण बताए वे थाने नहीं जाएंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि गिरफ्तारी और रिहाई के कारणों की जानकारी उन्हें दी जाए, ताकि वे इसकी सूचना लोकसभा अध्यक्ष को दे सकें।
दाल मंडी ध्वस्तीकरण से पहले ही था तनाव
दाल मंडी क्षेत्र में चल रहे ध्वस्तीकरण अभियान को लेकर पहले से ही व्यापारियों और स्थानीय लोगों में आक्रोश बताया जा रहा है। समाजवादी पार्टी ने इसे दुकानदारों पर अत्याचार करार देते हुए विरोध दर्ज कराया है।
फिलहाल पुलिस प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। वहीं, इस घटनाक्रम के बाद प्रदेश की सियासत में एक बार फिर गर्माहट बढ़ गई है और राजनीतिक बयानबाजी तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

