प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारियों से मिले पुलिस आयुक्त, बोले- ‘प्रशिक्षण काल ही उत्कृष्ट पुलिस अधिकारी की नींव रखता है’

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वाराणसी। स्टडी-कम-कल्चरल टूर के अंतर्गत आयोजित बेसिक कोर्स प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान आईपीएस-78 आरआर (2025 बैच) के 21 प्रशिक्षु अधिकारियों ने मंगलवार को पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल से शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर पुलिस आयुक्त ने प्रशिक्षु अधिकारियों के साथ संवाद करते हुए आधुनिक पुलिसिंग, नेतृत्व क्षमता, कानून-व्यवस्था, जनसेवा और तकनीकी चुनौतियों से निपटने के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण अवधि पुलिस सेवा का सबसे महत्वपूर्ण और स्वर्णिम समय होता है, क्योंकि इसी दौरान एक अधिकारी के व्यक्तित्व, अनुशासन और नेतृत्व की मजबूत नींव तैयार होती है।

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इस भ्रमण में 21 प्रशिक्षु अधिकारी शामिल थे, जिनमें 17 पुरुष और चार महिला अधिकारी थीं। इस अध्ययन भ्रमण का उद्देश्य विभिन्न राज्यों की पुलिस व्यवस्था, प्रशासनिक कार्यप्रणाली और सांस्कृतिक विरासत का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करना है। संवाद के दौरान पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने प्रशिक्षु अधिकारियों को कमिश्नरेट वाराणसी की कार्यप्रणाली से विस्तार से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि वाराणसी जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील शहर में पुलिसिंग केवल कानून लागू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि श्रद्धालुओं, पर्यटकों और आम नागरिकों की सुरक्षा, सुविधा और विश्वास बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों को कमिश्नरेट की आधुनिक व्यवस्थाओं की जानकारी देते हुए डायल-112, जल पुलिस, पर्यटक पुलिस, तकनीकी रूप से सशक्त एसओजी एवं सर्विलांस टीम, ड्रोन एवं एंटी-ड्रोन प्रणाली, अत्याधुनिक सीसीटीवी कंट्रोल रूम और वीवीआईपी सुरक्षा व्यवस्था की कार्यशैली के बारे में बताया। साथ ही श्रावण मास, देव दीपावली और महाकुंभ जैसे विशाल आयोजनों के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ के सफल प्रबंधन, यातायात नियंत्रण और आपदा प्रबंधन के अनुभव भी साझा किए।

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पुलिस आयुक्त ने कहा कि वर्तमान समय में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं, इसलिए प्रत्येक पुलिस अधिकारी को तकनीकी रूप से दक्ष होने के साथ-साथ नवाचार को अपनाने और अपराधियों से एक कदम आगे सोचने की क्षमता विकसित करनी होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक उत्कृष्ट पुलिस अधिकारी की पहचान केवल उसकी कार्रवाई से नहीं, बल्कि उसकी संवेदनशीलता, निष्पक्षता, सत्यनिष्ठा और जनता का विश्वास जीतने की क्षमता से होती है।

उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति अपनाने, महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा गुणवत्तापूर्ण विवेचना और सशक्त पैरवी को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने कहा कि पुलिस सेवा जनसेवा का सर्वोच्च माध्यम है और प्रत्येक अधिकारी को जनता के प्रति सहज, सुलभ, संवेदनशील और उत्तरदायी व्यवहार अपनाना चाहिए।

कार्यक्रम के समापन पर पुलिस आयुक्त ने सभी प्रशिक्षु अधिकारियों के साथ सामूहिक भोजन किया तथा उन्हें स्मृति-चिह्न भेंट कर उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह अध्ययन भ्रमण और प्रशिक्षण उन्हें भविष्य में एक सक्षम, संवेदनशील, निष्पक्ष और जनोन्मुख पुलिस अधिकारी बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इस अवसर पर अपर पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था एवं मुख्यालय) शिवहरी मीणा, अपर पुलिस आयुक्त (अपराध) आलोक प्रियदर्शी, पुलिस उपायुक्त काशी गौरव बंसवाल, पुलिस उपायुक्त वरुणा प्रमोद कुमार, पुलिस उपायुक्त गोमती नीतू, पुलिस उपायुक्त यातायात अनिल कुमार यादव सहित कमिश्नरेट के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

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