बाढ़ में भी नहीं टूटेगा गंगा घाटों का संपर्क, 35 घाटों पर बन रहे प्लेटफॉर्म और रैंप
41.25 करोड़ की परियोजना से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को मिलेगी बड़ी राहत
बाढ़ के दौरान भी एक घाट से दूसरे तक पहुंचना होगा सुगम
राजेंद्र प्रसाद, मान महल और हनुमान घाट समेत 35 घाटों पर आकार ले रही परियोजना
आपात स्थिति में एनडीआरएफ, जलपुलिस व स्वास्थ्य विभाग की टीम को भी होगी आसानी
वाराणसी। काशी के विश्वप्रसिद्ध गंगा घाटों पर हर वर्ष बाढ़ के दौरान श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय लोगों को एक घाट से दूसरे घाट तक पहुंचने में होने वाली परेशानी अब जल्द ही खत्म होने वाली है। गंगा के बढ़ते जलस्तर के समय 84 घाटों का आपसी संपर्क बनाए रखने के उद्देश्य से 35 प्रमुख घाटों पर 41.25 करोड़ रुपये की लागत से प्लेटफॉर्म और रैंप का निर्माण कराया जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का कार्य उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) की देखरेख में तेजी से चल रहा है।

हर साल मानसून में गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ कई घाटों का संपर्क टूट जाता है। इससे श्रद्धालुओं को लंबा चक्कर लगाकर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ता है। विशेष रूप से गंगा आरती, काशी विश्वनाथ धाम और अन्य धार्मिक स्थलों तक जाने वाले श्रद्धालुओं को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या के स्थायी समाधान के लिए जिला प्रशासन ने यह योजना तैयार की है।
परियोजना के तहत मीरघाट, प्रभु घाट, मानमंदिर घाट, राजेंद्र प्रसाद घाट, मानमहल घाट, त्रिपुरा भैरवी घाट, लाल घाट, गायघाट, राजघाट, राणा महल घाट, हनुमान घाट समेत कुल 35 घाटों पर मजबूत प्लेटफॉर्म और रैंप बनाए जा रहे हैं। इन संरचनाओं के निर्माण के बाद बाढ़ के दौरान भी घाटों के बीच आवाजाही निर्बाध बनी रहेगी।

बाढ़ के समय सबसे अधिक परेशानी उस मार्ग पर होती है, जहां ललिता घाट से दशाश्वमेध घाट की ओर जाने वाले श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है। काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन करने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा आरती देखने दशाश्वमेध घाट पहुंचते हैं, लेकिन मानमहल घाट और मीरघाट के बीच का रास्ता जलभराव और भीड़ के कारण बेहद संकरा हो जाता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद इस मार्ग पर आवागमन अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित हो सकेगा।
जिला प्रशासन का मानना है कि इस परियोजना से न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों में भी सुविधा होगी। बाढ़ के दौरान पुलिस, एनडीआरएफ, स्वास्थ्य विभाग और अन्य आपातकालीन सेवाओं को भी घाटों तक पहुंचने में आसानी होगी।
जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने कहा कि बाढ़ के समय श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो और गंगा घाटों का आपसी संपर्क बना रहे, इसी उद्देश्य से विभिन्न घाटों पर प्लेटफॉर्म और रैंप का निर्माण कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कार्य पूरा होने के बाद बाढ़ के दौरान भी श्रद्धालु और पर्यटक आसानी से एक घाट से दूसरे घाट तक पहुंच सकेंगे तथा दर्शन-पूजन और गंगा आरती का लाभ बिना किसी परेशानी के ले सकेंगे।
यह परियोजना काशी की धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन गतिविधियों को बाढ़ के दौरान भी निर्बाध बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इसके पूरा होने से हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

