घाटों पर गूंजने लगे फाग, बनने लगी गुझिया और मिठाई, होली के रंग में रंगी काशी
वाराणसी। काशी में होली का उल्लास इस बार कुछ खास नजर आ रहा है। रंगों का यह पर्व यहां केवल एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि परंपरा, आस्था और उमंग का विस्तृत पर्व बन चुका है। रंगभरी एकादशी के साथ ही काशी में होली की औपचारिक शुरुआत हो गई और अब शहर की गलियों से लेकर घाटों तक रंग, गुलाल और फाग की गूंज सुनाई दे रही है।

घाटों पर गूंजने लगे फाग गीत
घाटों पर फाग गीतों की महफिल सज रही है। ढोलक और झाल की थाप पर गायक टोली पारंपरिक होली गीत गा रही है, तो श्रोता भी झूमते नजर आते हैं। गंगा किनारे बैठकर गुलाल लगाते और गले मिलते लोग प्रेम और सौहार्द का संदेश दे रहे हैं।

विश्वनाथ धाम में विशेष होली
सबसे अधिक रौनक काशी विश्वनाथ मंदिर में दिखाई दे रही है। यहां परंपरागत रंगों के साथ फूलों की होली खेलने की तैयारी की गई है। मंदिर परिसर को रंग-बिरंगी झालरों और फूलों से सजाया गया है। भक्त भगवान को गुलाल अर्पित कर एक-दूसरे को रंग लगाते हुए उत्सव का आनंद ले रहे हैं। पूरा वातावरण भक्तिमय और रंगमय हो उठा है।

बाजारों में बढ़ी रौनक
शहर के बाजारों में भी होली की चमक साफ दिखाई दे रही है। इलेक्ट्रॉनिक पिचकारी बच्चों और युवाओं की पहली पसंद बनी हुई है, जबकि हर्बल गुलाल की मांग भी बढ़ी है। लोग प्राकृतिक रंगों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे त्वचा और पर्यावरण दोनों सुरक्षित रहें। मिठाई की दुकानों पर शुगर-फ्री गुजिया से लेकर ड्राई फ्रूट मिठाइयों तक की भरमार है। कई दुकानों पर “होली स्पेशल” पैकिंग में आकर्षक गिफ्ट बॉक्स भी उपलब्ध हैं।

होली के संदेश वाले रंग-बिरंगे टी-शर्ट की डिमांड
युवा वर्ग के बीच होली संदेश वाले रंग-बिरंगे टी-शर्ट और कुर्तों का खास क्रेज देखने को मिल रहा है। गृहिणियों का कहना है कि महंगाई के बावजूद उन्होंने घर में पारंपरिक पकवान जैसे गुझिया और नमकीन तैयार किए हैं, क्योंकि होली का स्वाद घर के बने व्यंजनों से ही पूरा होता है।
काशी में होली केवल रंगों का नहीं, बल्कि परंपरा, संगीत, भक्ति और भाईचारे का उत्सव बन गई है। शहर का बदला हुआ माहौल यह संकेत दे रहा है कि इस बार होली यादगार रहने वाली है।

