पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का काशी में भव्य स्वागत, सनातन संस्कृति को बताया विश्व शांति का मार्ग, गौमाता को राज्यमाता घोषित करने की मांग पर किया समर्थन

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वाराणसी। बागेश्वर धाम सरकार के नाम से प्रसिद्ध कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इन दिनों काशी प्रवास पर हैं। शुक्रवार को उन्होंने अस्सी क्षेत्र स्थित मछली बंदर मठ पहुंचकर मठ के पीठाधीश्वर से आशीर्वाद प्राप्त किया। उनके आगमन की सूचना मिलते ही मठ परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। संत-महंतों और स्थानीय लोगों ने पुष्प वर्षा कर उनका भव्य स्वागत किया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने “हर-हर महादेव”, “जय श्रीराम” और “जय हनुमान” के जयघोष से पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

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मठ में कुछ समय रुककर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने पीठाधीश्वर के साथ विभिन्न आध्यात्मिक विषयों पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने मठ में ही भोजन ग्रहण किया और वहां उपस्थित श्रद्धालुओं से आत्मीय बातचीत भी की। उनके अनुयायियों और स्थानीय लोगों ने उनके साथ सेल्फी ली तथा आशीर्वाद प्राप्त किया।

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मछली बंदर मठ से निकलने के बाद धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अस्सी घाट पहुंचे। गंगा तट पर उन्होंने कुछ समय व्यतीत किया और अपने अनुयायियों से बातचीत की। घाट पर भी उनके दर्शन के लिए लोगों की बड़ी संख्या में भीड़ जमा हो गई। भक्तों ने जयघोष करते हुए उनका स्वागत किया। इसके बाद वे अपने अनुयायियों के साथ काशी के प्रसिद्ध श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन के लिए रवाना हो गए। रास्ते भर लोगों ने उनका स्वागत किया और धार्मिक नारों से पूरा माहौल गूंज उठा।

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श्री काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचकर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपनी माता के साथ विधिवत दर्शन-पूजन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत की सनातन संस्कृति में वह शक्ति है, जो पूरे विश्व को शांति और संतुलन का मार्ग दिखा सकती है। उन्होंने कहा कि यदि विश्व में फैली अशांति को समाप्त करना है तो सनातन की विचारधारा को अपनाना आवश्यक है।

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इस दौरान उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ट्रंप भरोसेमंद नहीं हैं, क्योंकि वे शाम को कुछ और कहते हैं और सुबह कुछ और। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से उन्होंने अपने अधिकारों का उपयोग कर टैरिफ वार की शुरुआत की, उससे उनकी कार्यशैली स्पष्ट होती है और इससे विश्व में अशांति का वातावरण बनता है।

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धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा उठाए गए गौ रक्षा और गाय को राज्य माता का दर्जा देने के मुद्दे का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि गौ, गंगा और गीता से जुड़े किसी भी विषय पर वे हमेशा समर्थन में खड़े रहेंगे। उन्होंने स्वयं को गौ सेवक बताते हुए कहा कि शंकराचार्य द्वारा उठाया गया यह मुद्दा महत्वपूर्ण है और इसका नैतिक समर्थन किया जाना चाहिए।

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इसके अलावा उन्होंने यूजीसी की नीतियों को लेकर भी सरकार से पुनर्विचार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत एकता और अखंडता का देश है, इसलिए ऐसी नीतियां नहीं बननी चाहिए जिनसे समाज में विभाजन की स्थिति पैदा हो। देश को जोड़ने वाली नीतियों की आवश्यकता है, न कि दीवार खड़ी करने वाली।

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