वाराणसी की गंज शहीदा मस्जिद पर पोस्ट कर पाक प्रेसिडेंट जरदारी ने खेला 'गंदा खेल', भारत ने बताया 'अनावश्यक और मूर्खतापूर्ण हस्तक्षेप'.... जानिए क्या है पूरा विवाद

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वाराणसी। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने वाराणसी की गंज शहीदा मस्जिद को लेकर एक्स पर पोस्ट करके भारत के आंतरिक मामलों में टांग अड़ाने की कोशिश की है। पाक प्रेसिडेंट के ऑफिशियल अकाउंट से बयान में उन्होंने भारत में मुस्लिम धार्मिक स्थलों पर कथित खतरे की बात की और खासकर काशी की इस मस्जिद का जिक्र करते हुए भारत से तुरंत रुकने को कहा।

भारत सरकार ने इस बयान को पूरी तरह खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय (MEA) ने साफ कहा कि यह “अनावश्यक और अनुचित” टिप्पणी है। MEA के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति को भारत के आंतरिक मामलों पर कोई टिप्पणी करने का “locus standi” (वैधानिक अधिकार) नहीं है। MEA ने आगे कहा कि पाकिस्तान का खुद अल्पसंख्यकों के साथ रिकॉर्ड बेहद खराब है, इसलिए ऐसे बयान मूर्खतापूर्ण हैं और राजनीतिक मकसद से दिए गए लगते हैं।

असली मामला क्या है?
काशी रेलवे स्टेशन के मुख्य द्वार के पास स्थित गंज शहीदा मस्जिद को नॉर्दर्न रेलवे ने नोटिस दिया था। नोटिस में कहा गया कि यह रेलवे की जमीन पर अवैध निर्माण है। 20 जून तक इसे हटाने को कहा गया था, नहीं तो रेलवे खुद कार्रवाई करेगी। यह नोटिस काशी स्टेशन के विस्तार और रीडेवलपमेंट के काम से जुड़ा है। रेलवे ने 1991 के एक पुराने केस का हवाला दिया जिसमें कोर्ट ने रेलवे के पक्ष में फैसला सुनाया था।

मस्जिद कमेटी का कहना है कि मस्जिद पुरानी है और उन्होंने कोर्ट में चुनौती दी है। अभी तक कोई बुलडोजर कार्रवाई नहीं हुई है।

पाकिस्तान का बयान क्यों?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी विकास की रफ्तार पकड़ रहा है। स्टेशन नया हो रहा है, सुविधाएं बढ़ रही हैं। पाकिस्तान का बयान ठीक इसी समय आया है, जो साफ तौर पर भारत के आंतरिक विकास कार्यों में दखल देने की कोशिश है। भारत ने बार-बार कहा है कि ऐसे मामले पूरी तरह आंतरिक हैं और किसी विदेशी नेता को इन पर बोलने की जरूरत नहीं।
बनारस के लोग जानते हैं कि यहां विकास हो रहा है, लेकिन कानून का पालन भी हो रहा है। अगर कोई विवाद है तो उसके लिए न्यायालय है। पाकिस्तान को अपनी सीमाओं में अल्पसंख्यकों की स्थिति सुधारनी चाहिए, बजाय भारत पर उंगली उठाने के। यह पूरा विवाद अब कोर्ट और प्रशासन के स्तर पर चलेगा। काशी आगे बढ़ रही है, कोई बाहरी बयान इसे रोक नहीं सकता।

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