पद्मविभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्रा का निधन, मिर्जापुर में बेटी के घर ली अंतिम सांस, लंबे समय से चल रहे थे बीमार
वाराणसी। बनारस घराने के ख्यातिलब्ध शास्त्रीय गायक, पद्मविभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्रा का गुरुवार की सुबह निधन हो गया। वे 89 साल के थे। मिर्जापुर में बेटी नम्रता के घर उन्होंने भोर में अंतिम सांस ली। अपनी उम्दा गायकी और सुरों के चलते उन्होंने देश-विदेश में ख्याति प्राप्त की। वे 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी के प्रस्तावक रहे। उनका अंतिम संस्कार गुरुवार की शाम काशी के मणिकर्णिका घाट पर किया जाएगा।
पंडित छन्नूलाल मिश्रा की चार बेटियां और एक बेटा है। पत्नी और एक बेटी का निधन हो चुका है। पंडित छन्नूलाल मिश्रा इस समय अपनी बेटी नम्रता के घर रह रहे थे। उनकी तबीयत पिछले सात माह से खराब थी। 11 सितंबर को उनकी तबीयत बिगड़ गई। सीने में दर्द की शिकायत पर उन्हें रामकृष्ण सेवाश्रम में भर्ती कराया गया। 13 सितंबर की रात बीएचयू रेफर किया गया। तबीयत में सुधार होने पर उन्हें 27 सितंबर को अस्पताल से छुट्टी मिल गई थी। उसके बाद बेटी के घर मिर्जापुर चले गए थे।
पंडित छन्नुलाल मिश्रा का जन्म 3 अगस्त 1936 को उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ जिले के हरिहरपुर में हुआ था। उनके दादा गुदई महाराज शांता प्रसाद एक प्रसिद्ध तबला वादक थे। पंडित छन्नूलाल मिश्रा ने अपने पिता से संगीत की प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की और आगे चलकर बनारस में संगीत की विधिवत शिक्षा ली। उन्होंने उस्ताद अब्दुल गनी खां से संगीत की गहन शिक्षा प्राप्त की। पंडित जी बनारस घराने की गायकी, विशेषकर ख्याल और पूरब अंग की ठुमरी के लिए प्रसिद्ध थे। उनकी प्रस्तुतियां भावपूर्ण और मधुरता से परिपूर्ण होती थीं, जिससे उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त हुई।
पंडित छन्नूलाल मिश्रा को पूरब अंग की ठुमरी का प्रमुख प्रतिपादक माना जाता है। उनके अनेक संगीत एल्बम जारी हो चुके हैं। वे आकाशवाणी (AIR) और दूरदर्शन के शीर्ष ग्रेड कलाकार रहे। पंडित छन्नुलाल मिश्र को उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, नौशाद पुरस्कार और यश भारती पुरस्कार से सम्मानित किया गया। भारत सरकार ने उन्हें 2010 में पद्मभूषण और 2020 में पद्मविभूषण से सम्मानित किया। वे संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप से भी अलंकृत किए गए थे।

