एआई के दौर में शोध की मौलिकता और फील्ड वर्क जरूरी, बीएचयू के पत्रकारिता विभाग में शोधार्थियों से संवाद, तकनीक के जिम्मेदारीपूर्वक इस्तेमाल पर दिया जोर
वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में शोध पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते प्रभाव को लेकर शोधार्थियों के साथ संवाद आयोजित किया गया। इसमें विशेषज्ञों ने शोध की मौलिकता, जमीनी अनुभव और अंतर्विषयक दृष्टिकोण के महत्व पर प्रकाश डाला। प्रो. हरीश ने कहा कि एआई शोध कार्य को आसान बनाने में उपयोगी हो सकता है, लेकिन इसके इस्तेमाल में शोध नैतिकता और मौलिक चिंतन को प्राथमिकता देना जरूरी है।
स्क्रीन तक सीमित न रहें शोधार्थी, समाज के बीच जाएं
प्रो. हरीश ने कहा कि जनसंचार के विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए केवल बंद कमरों और स्क्रीन तक सीमित रहकर शोध करना पर्याप्त नहीं है। उन्हें समाज के बीच जाकर लोगों से संवाद करना चाहिए और वास्तविक परिस्थितियों को प्रत्यक्ष रूप से समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि शोध की विश्वसनीयता के लिए फील्ड वर्क और वास्तविक अनुभव का विशेष महत्व है। जनसंचार के विद्यार्थी आम लोगों की आवाज के संवाहक होते हैं। इसलिए समाज के विभिन्न वर्गों के साथ उनका सीधा जुड़ाव जरूरी है।
एआई का इस्तेमाल हो जिम्मेदारी और नैतिकता के साथ
प्रो. हरीश ने शोध की मौलिकता पर जोर देते हुए कहा कि तकनीक का उपयोग शोध को सुविधाजनक बना सकता है, लेकिन शोधार्थियों को पूरी तरह इस पर निर्भर नहीं होना चाहिए। अपने अवलोकन, विश्लेषण और मौलिक चिंतन को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को स्क्रीनटाइम कम करने और वास्तविक सामाजिक परिवेश से जुड़कर अध्ययन करने की सलाह दी। उनके अनुसार, शोध में तकनीक के साथ मानवीय अनुभव का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
अंतर्विषयक दृष्टिकोण से शोध को मिलेगी नई दिशा
प्रो. अनुराग दवे ने विद्यार्थियों से शोध में अंतर्विषयक दृष्टिकोण अपनाने की अपील की। उन्होंने सिनेमा और समाज के बदलते परिदृश्य पर चर्चा करते हुए कहा कि मीडिया और संचार का अध्ययन व्यापक सामाजिक बदलावों से जोड़कर किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बदलती तकनीक, समाज और संचार माध्यमों के बीच संबंधों को समझना वर्तमान समय में शोध की नई संभावनाओं को खोलता है।
शोधार्थियों के लिए उपयोगी रहा संवाद
कार्यक्रम का संचालन डॉ. बाला लखेंद्र ने किया। उन्होंने एआई के दौर में शोध की बदलती प्रकृति और मीडिया अध्ययन की नई संभावनाओं पर चर्चा को आगे बढ़ाया। अंत में विभागाध्यक्ष प्रो. ज्ञान प्रकाश मिश्रा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर प्रो. अनुराग दवे, प्रो. ज्ञान प्रकाश मिश्रा, प्रो. शोभना नेर्लीकर, डॉ. बाला लखेंद्र, डॉ. नेहा पांडेय सहित बड़ी संख्या में शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

