रथयात्रा के दूसरे दिन झमाझम बारिश से खुशनुमा हुआ काशी का मौसम, श्रद्धालुओं में उत्साह, गूंजता रहा जय जगन्नाथ का जयघोष
वाराणसी। विश्व प्रसिद्ध काशी रथयात्रा मेले के दूसरे दिन शुक्रवार को मौसम ने अचानक करवट ली और झमाझम बारिश ने पूरे शहर को तरबतर कर दिया। कई दिनों से भीषण गर्मी और उमस से परेशान काशीवासियों को इस वर्षा से बड़ी राहत मिली। वहीं, रथयात्रा में शामिल श्रद्धालुओं ने इस बारिश को सामान्य प्राकृतिक घटना नहीं, बल्कि भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और माता सुभद्रा के स्वागत में इंद्रदेव द्वारा किए गए दिव्य जलाभिषेक के रूप में देखा। बारिश के बीच भी श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ और "जय जगन्नाथ" के जयघोष के साथ दर्शन-पूजन का सिलसिला जारी रहा।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रथयात्रा के दौरान होने वाली वर्षा को अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि देवताओं के राजा इंद्र भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर अपनी प्रसन्नता वर्षा के रूप में प्रकट करते हैं। ओडिशा के पुरी सहित देश के कई स्थानों पर रथयात्रा के दौरान होने वाली बारिश को भगवान के जलाभिषेक और प्रकृति के मंगल संदेश का प्रतीक माना जाता है। काशी में भी श्रद्धालुओं ने इसी आस्था के साथ वर्षा का स्वागत किया।
बारिश शुरू होते ही मेले का वातावरण और भी भक्तिमय हो गया। श्रद्धालु भीगते हुए भगवान के दर्शन करते रहे और हर ओर "जय जगन्नाथ" के उद्घोष गूंजते रहे। कई श्रद्धालुओं ने इसे भगवान की विशेष कृपा बताते हुए कहा कि रथयात्रा के दौरान हुई यह वर्षा पूरे समाज के लिए शुभ संकेत है और इससे धार्मिक उत्सव का महत्व और अधिक बढ़ गया है।

लगातार पड़ रही तेज गर्मी और उमस से लोग पिछले कई दिनों से परेशान थे। बारिश के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई, जिससे मौसम सुहावना हो गया। ठंडी हवाओं और रिमझिम फुहारों के बीच रथयात्रा मेले में पहुंचे श्रद्धालुओं, स्थानीय नागरिकों और बाहर से आए पर्यटकों ने भी राहत महसूस की। मौसम के अनुकूल होने से मेले में श्रद्धालुओं की आवाजाही भी उत्साहपूर्ण बनी रही।
धार्मिक जानकारों का कहना है कि रथयात्रा के दौरान होने वाली वर्षा को समृद्धि, सुख-शांति और लोककल्याण का प्रतीक माना जाता है। यह संदेश देती है कि प्रकृति भी भगवान जगन्नाथ की इस पावन यात्रा में सहभागी बनकर उनका अभिनंदन कर रही है। उनके अनुसार ऐसी वर्षा को शुभ फलदायी माना जाता है और इसे धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व प्राप्त है।
रथयात्रा के दूसरे दिन हुई इस बारिश ने जहां श्रद्धालुओं की आस्था को और प्रगाढ़ किया, वहीं काशीवासियों को भीषण गर्मी से राहत देकर उत्सव की खुशियों को दोगुना कर दिया। पूरे मेले में भक्ति, उल्लास और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला, जिससे रथयात्रा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व और अधिक बढ़ गया।

