विजयादशमी पर काशी विश्वनाथ धाम में गूंजा शौर्य और धर्म का संदेश, विधि-विधान से हुआ शस्त्र पूजन
वाराणसी। विजयादशमी के पावन अवसर पर श्री काशी विश्वनाथ धाम में मंगलवार को पारंपरिक श्रद्धा और शास्त्रोक्त विधि-विधान के साथ शस्त्र पूजन समारोह का आयोजन किया गया। धाम स्थित मंदिर चौक के सांस्कृतिक मंच पर आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में शक्ति, शौर्य और धर्म की रक्षा के संकल्प को प्रमुखता से अभिव्यक्त किया गया। समारोह में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास का प्रतिनिधित्व करते हुए मुख्य कार्यपालक अधिकारी सत्यम मिश्र ने यजमान के रूप में शस्त्र पूजन संपन्न कराया।
विजयादशमी भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण पर्व है, जो अधर्म पर धर्म, असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। भगवान श्रीराम द्वारा रावण पर विजय की स्मृति में मनाया जाने वाला यह पर्व लोगों को सत्य, साहस, कर्तव्यनिष्ठा और नैतिकता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। इसी परंपरा के अंतर्गत शस्त्र पूजन का विशेष महत्व है।

शक्ति और सुरक्षा के प्रति सम्मान का प्रतीक है शस्त्र पूजन
भारतीय परंपरा में शस्त्र पूजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि शक्ति और शौर्य के प्रति सम्मान तथा उनके सदुपयोग के संकल्प का प्रतीक भी है। यह परंपरा समाज, राष्ट्र और धर्म की रक्षा के प्रति उत्तरदायित्व का बोध कराती है। विजयादशमी पर शस्त्रों की पूजा कर उनके उपयोग को लोककल्याण, सुरक्षा और न्याय से जोड़ने का संदेश दिया जाता है।
समारोह के दौरान शास्त्रोक्त विधि से शस्त्रों का पूजन किया गया। साथ ही राष्ट्र की एकता, अखंडता, शांति और सुरक्षा के लिए मंगलकामना की गई। आयोजन ने विजयादशमी के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करते हुए धर्म, सत्य, साहस और नैतिक मूल्यों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया। श्री काशी विश्वनाथ धाम में आयोजित इस समारोह ने पर्व की पारंपरिक गरिमा को आगे बढ़ाते हुए श्रद्धा और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध की भावना को अभिव्यक्त किया।

