रंगभरी एकादशी पर काशी सज-धज कर तैयार, बाबा की चल प्रतिमा संग होगी अबीर-गुलाल की होली

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वाराणसी। रंगभरी एकादशी के पावन अवसर पर इस वर्ष व्यापक स्तर पर तैयारियाँ पूर्ण कर ली गई हैं। मंदिर प्रांगण में काशीवासियों को अपने आराध्य महादेव की चल प्रतिमा के साथ अबीर, गुलाल और रंगों की होली खेलने के लिए आमंत्रित किया गया है।

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परंपरा के अनुसार बाबा की चल प्रतिमा बाहर से लाई जाएगी। क्षेत्र की संकरी गलियों और भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए पुलिस प्रशासन और महंत परिवार की बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया है कि प्रतिमा के साथ आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या अधिकतम 64 तक ही सीमित रहेगी, जिससे सुव्यवस्था बनी रहे और अनावश्यक भीड़ न हो।

 रंगभरी एकादशी

लोकाचार एवं सांस्कृतिक शास्त्रीय परंपरा के अनुरूप चल प्रतिमा को गर्भगृह में विराजमान कराया जाएगा, जहां सप्तऋषि आरती सहित अन्य अनुष्ठान विधिपूर्वक संपन्न होंगे।

इस वर्ष आयोजन में एक विशेष परिवर्तन भी किया गया है। शिवार्चनम मंच पर आयोजित कार्यक्रमों के दौरान श्रद्धालु परस्पर अबीर-गुलाल नहीं खेलेंगे, बल्कि वहाँ ‘फूलों की होली’ की व्यवस्था की गई है, जिससे आयोजन की गरिमा और अनुशासन बना रहे।रात्रि 10 बजे तक चलने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों का समापन ब्रज के रसिकों की मंडली द्वारा प्रस्तुत ‘फूलों की होली’ से होगा। यह प्रस्तुति काशी और ब्रज की सांस्कृतिक एकात्मता का सुंदर प्रतीक बनेगी।

समस्त श्रद्धालुओं से निवेदन है कि वे शालीन वेशभूषा में उपस्थित होकर अपनी सभ्यता, संस्कार और मर्यादा का परिचय दें तथा बाबा विश्वनाथ को भक्ति अर्पित करें।काशी की ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक गरिमा को बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

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