गुरु पूर्णिमा पर गुरु भक्ति में सराबोर हुई काशी, मठ-मंदिरों और आश्रमों में उमड़ा शिष्यों का रेला, गुरु का आशीर्वाद प्राप्त कर धन्य हुए शिष्य
वाराणसी। धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व बुधवार को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। शहर के प्रमुख मठों, मंदिरों और आश्रमों में सुबह से ही गुरु पूजन, चरण पादुका वंदन, रुद्राभिषेक, चक्रार्चन, भजन-कीर्तन, सत्संग और भंडारों का आयोजन हुआ। देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने अपने-अपने गुरुओं का पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। काशी की गलियां, घाट और संत पीठ दिनभर "जय गुरुदेव" के जयघोष से गूंजते रहे।

गुरुधाम स्थित प्राचीन श्रीराम मंदिर में जगतगुरु रामानंदाचार्य डॉ. राम कमलाचार्य वेदांती महाराज के सानिध्य में गुरु पूर्णिमा महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्री शालिग्राम भगवान एवं जगतगुरु का अभिषेक किया गया। विरक्त संतों ने गुरु पूजन किया और श्रद्धालुओं ने माल्यार्पण कर आशीर्वाद लिया। अपने आशीर्वचन में वेदांती महाराज ने कहा कि "गुरु ही वह शक्ति हैं, जो शिष्य के जीवन से अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। गुरु के मार्गदर्शन से ही जीवन सार्थक बनता है और मनुष्य धर्म, सत्य एवं मानवता के मार्ग पर अग्रसर होता है।"

मंदिर परिसर में आयोजित भजन संध्या में विजय कपूर, अमलेश शुक्ला, आस्था शुक्ला, व्यास मौर्य, कृष्ण तिवारी एवं बलराम ने भगवान श्रीराम और गुरु महिमा पर आधारित भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। श्रीराम कथा के समापन अवसर पर कथा व्यास सद्भव तिवारी ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया।

इसी प्रकार पंचक्रोशी मार्ग स्थित देउरा के श्री शंकराचार्य आश्रम में सुमेरू पीठ के शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती जी महाराज के सानिध्य में गुरु पूर्णिमा महोत्सव श्रद्धापूर्वक मनाया गया। सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। भक्तों ने गुरु चरणों में पुष्प अर्पित कर आशीर्वाद लिया। आश्रम में मां त्रिपुरसुंदरी भगवती ललितांबा का चक्रार्चन, भगवान चंद्रमौलेश्वर का महारुद्राभिषेक तथा अन्य वैदिक अनुष्ठान संपन्न हुए। इस अवसर पर चातुर्मास अनुष्ठान का भी शुभारंभ किया गया। शंकराचार्य ने कहा कि गुरु केवल ज्ञान देने वाले नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाले पथप्रदर्शक होते हैं।

जगतगुरु श्रीरामानन्दाचार्य स्वामी भगवदाचार्य पीठम् संस्कृत अध्ययन केन्द्रम् स्थित प्राचीन शिव-हनुमान मंदिर में भी गुरु पूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। सैकड़ों श्रद्धालुओं एवं शिष्यों ने अपने सद्गुरु का पूजन-अर्चन कर आरती उतारी और चरण वंदन किया। वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और गुरु वंदना के बीच पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा।

इस अवसर पर स्वामी श्रवणदास महाराज ने कहा कि गुरु ही जीवन के सच्चे पथप्रदर्शक हैं, जो अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर सत्य, धर्म और सदाचार का मार्ग दिखाते हैं। उन्होंने शास्त्रों में वर्णित "गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः..." श्लोक का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु को साक्षात परब्रह्म का स्वरूप माना गया है। उनके बताए मार्ग पर चलकर ही मनुष्य आत्मिक शांति, सद्बुद्धि और मोक्ष की प्राप्ति कर सकता है।

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर काशी के विभिन्न मठों, अखाड़ों और संत पीठों में वेदपाठ, यज्ञ, हवन, सत्संग, प्रवचन और विशाल भंडारों का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने गुरु पूजन के साथ सेवा, प्रसाद वितरण और श्रमदान में भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। पुलिस एवं प्रशासन ने प्रमुख धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा और यातायात की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की। गुरु पूर्णिमा के इस महापर्व पर काशी ने एक बार फिर गुरु-शिष्य परंपरा, सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का अनुपम संदेश देते हुए यह सिद्ध किया कि गुरु ही ज्ञान, संस्कार और मोक्ष के सच्चे पथप्रदर्शक हैं।




