गुरु पूर्णिमा पर क्रीं कुंड बना आस्था का महासंगम, अघोर पीठाधीश्वर के दर्शन को उमड़ा श्रद्धालुओं का रेला
वाराणसी। अघोर परंपरा के विश्वविख्यात तीर्थस्थल बाबा कीनाराम आश्रम (क्रीं कुंड) में गुरु पूर्णिमा का महापर्व बुधवार को अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आश्रम पहुंचे। अघोर पीठाधीश्वर सिद्धार्थ गौतम राम के दर्शन और आशीर्वाद के लिए सुबह से देर शाम तक श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ता रहा। पूरा आश्रम परिसर "जय बाबा कीनाराम" और गुरु वंदना के जयघोष से गूंजता रहा, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत दिखाई दिया।

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर तड़के ही श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया था। सुबह होते-होते दर्शनार्थियों की लंबी कतारें आश्रम परिसर से बाहर तक पहुंच गईं। करीब तीन किलोमीटर लंबी लाइन में खड़े श्रद्धालु हाथों में फूल-माला, नारियल, चुनरी और पूजा सामग्री लिए अपने गुरु के दर्शन की प्रतीक्षा करते रहे। दूर-दराज के राज्यों के साथ-साथ नेपाल, मॉरीशस और अन्य देशों से आए श्रद्धालुओं ने भी गुरु के श्रीचरणों में शीश नवाकर आशीर्वाद प्राप्त किया। श्रद्धालुओं का उत्साह और आस्था देखते ही बन रही थी।

गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर आश्रम में विशेष पूजा-अर्चना, गुरु चरण वंदना, वैदिक मंत्रोच्चार तथा अघोर परंपरा के अनुरूप विविध धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने गुरु के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा और समर्पण व्यक्त करते हुए सुख, शांति, आरोग्य, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति की कामना की। आश्रम के संतों ने बताया कि अघोर परंपरा में गुरु को आत्मज्ञान, सेवा, करुणा और मानव कल्याण का मार्ग दिखाने वाला सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। इसलिए गुरु पूर्णिमा का पर्व क्रीं कुंड में विशेष महत्व के साथ मनाया जाता है।

दिनभर आश्रम परिसर में भजन-कीर्तन, सत्संग, आध्यात्मिक प्रवचन और गुरु महिमा का गुणगान चलता रहा। श्रद्धालुओं ने क्रीं कुंड की परिक्रमा की तथा अघोराचार्य बाबा कीनाराम की समाधि पर मत्था टेककर आशीर्वाद प्राप्त किया। मान्यता है कि गुरु पूर्णिमा के दिन यहां दर्शन-पूजन और गुरु वंदना करने से विशेष आध्यात्मिक फल प्राप्त होता है तथा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आत्मिक शांति का संचार होता है।

श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे की व्यवस्था की गई थी, जहां प्रसाद के रूप में चने की घुघरी और हलवे का वितरण पूरे दिन चलता रहा। हजारों श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण किया। आश्रम के सेवकों और स्वयंसेवकों ने भोजन वितरण, दर्शन व्यवस्था और श्रद्धालुओं के मार्गदर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे आयोजन सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।

भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। आश्रम परिसर और आसपास के क्षेत्रों में बैरिकेडिंग, यातायात नियंत्रण, चिकित्सा सहायता, पेयजल व्यवस्था तथा स्वयंसेवकों की तैनाती की गई थी। सुरक्षा व्यवस्था के बीच श्रद्धालुओं ने शांतिपूर्वक दर्शन किए। गुरु पूर्णिमा का यह महापर्व क्रीं कुंड में एक बार फिर आस्था, सेवा, अनुशासन और गुरु-शिष्य परंपरा की जीवंत मिसाल बनकर सामने आया, जहां लाखों श्रद्धालुओं ने गुरु का आशीर्वाद लेकर अपने जीवन में सुख, समृद्धि, आत्मिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति की कामना की।




