सावन के अंतिम सोमवार को कर्दमेश्वर महादेव का फूलों से भव्य श्रृंगार, दर्शन को भक्तों की लगी कतार, गूंजा हर-हर महादेव का उद्घोष

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सावन के अंतिम सोमवार पर चंपा, चमेली, गुलाब, अपराजिता, बेलपत्र और धतूरे से हुआ बाबा का भव्य श्रृंगार

 

विशेष आरती में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, जलाभिषेक कर भक्तों ने मांगी सुख-समृद्धि

 

काशी की प्राचीन धरोहर और पंचक्रोशी यात्रा का प्रमुख पड़ाव है कर्दमेश्वर महादेव मंदिर

वाराणसी। सावन के अंतिम सोमवार पर कंदवा स्थित प्राचीन कर्दमेश्वर महादेव मंदिर में बाबा का भव्य फूलों का श्रृंगार किया गया। चंपा, चमेली, गुलाब, अपराजिता, बेलपत्र, धतूरा और विभिन्न फूलों की मालाओं से भगवान शिव का आकर्षक श्रृंगार किया गया। विशेष श्रृंगार के बाद विधि-विधान से महाआरती हुई। आरती के दौरान मंदिर परिसर शिव स्तोत्र और शिव स्तुति से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने हर-हर महादेव, जय शिव शंकर और बोल बम के जयकारे लगाए।

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सुबह से ही बाबा के दर्शन-पूजन के लिए मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी थी। भक्तों ने बाबा का जलाभिषेक कर बेलपत्र, धतूरा और पुष्प अर्पित किए। शाम को विशेष श्रृंगार और आरती के समय मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ गई। घंटा-घड़ियाल की ध्वनि और जयघोष से पूरा कंदवा क्षेत्र भक्तिमय नजर आया।

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काशी की प्राचीन धरोहर है मंदिर
कंदवा गांव में स्थित कर्दमेश्वर महादेव मंदिर धार्मिक आस्था के साथ ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। मंदिर की बाहरी दीवारों पर देवी-देवताओं, नर्तकों, संगीतकारों, नागों और पौराणिक जीवों की आकृतियां उत्कीर्ण हैं। इनमें कई मूर्तियों को छठी-सातवीं शताब्दी का माना जाता है। मंदिर को उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से प्राचीन एवं ऐतिहासिक स्मारक के रूप में संरक्षित किया गया है।

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कर्दम ऋषि की तपोस्थली से जुड़ी मान्यता
धार्मिक मान्यता है कि कर्दम ऋषि ने यहां तपस्या कर शिवलिंग की स्थापना की थी। इसी कारण भगवान शिव कर्दमेश्वर महादेव के नाम से प्रसिद्ध हुए। मंदिर के समीप स्थित कर्दम कुंड भी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। एक अन्य मान्यता के अनुसार लंका विजय के बाद भगवान श्रीराम ने माता सीता के साथ यहां दर्शन-पूजन और परिक्रमा की थी।

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पंचक्रोशी यात्रा का प्रमुख पड़ाव
कर्दमेश्वर महादेव मंदिर काशी की पंचक्रोशी यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ावों में शामिल है। सावन, महाशिवरात्रि और पंचक्रोशी यात्रा के दौरान यहां विशेष भीड़ रहती है। मंदिर की स्थापत्य शैली, प्राचीन प्रतिमाएं और धार्मिक मान्यताएं इसे काशी की विशिष्ट धरोहर बनाती हैं।

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