नाग पंचमी पर बचऊ वीर अखाड़े में पहलवानों ने दिखाया दमखम, रोमांचक मुकाबलों में विजेताओं को मिला नगद पुरस्कार 

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वाराणसी। नाग पंचमी के पावन पर्व पर काशी हिंदू विश्वविद्यालय परिसर स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर के बचऊ वीर अखाड़े में पारंपरिक दंगल प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। अखाड़े की मिट्टी में बच्चों से लेकर अनुभवी पहलवानों तक ने जोर आजमाइश की और कुश्ती के विभिन्न दांव-पेच दिखाए। रोमांचक मुकाबलों को देखने के लिए आसपास के लोग बड़ी संख्या में जुटे। दर्शकों ने तालियों और जयकारों से पहलवानों का उत्साह बढ़ाया।

सुबह पूजा-अर्चना के बाद दंगल की शुरुआत हुई। इसके बाद एक-एक कर पहलवान अखाड़े में उतरे और प्रतिद्वंद्वियों को चुनौती दी। मुकाबले आगे बढ़ने के साथ दर्शकों का उत्साह भी बढ़ता गया। पहलवानों ने अपनी शारीरिक क्षमता, फुर्ती और तकनीक का प्रदर्शन किया। पूरे आयोजन में पारंपरिक कुश्ती की खेल भावना नजर आई।

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गुल्लू और काशी की कुश्ती रही आकर्षण का केंद्र
बड़े पहलवानों के मुकाबलों में गुल्लू पहलवान और काशी पहलवान के बीच हुई कुश्ती विशेष आकर्षण का केंद्र रही। दोनों ने एक-दूसरे को पटखनी देने के लिए कई दांव आजमाए, लेकिन निर्धारित समय तक कोई निर्णायक बढ़त हासिल नहीं कर सका। अंत में मुकाबला बराबरी पर समाप्त हुआ।

इसके बाद सपा नेता अमन यादव और भाजपा पार्षद राम सिंह कल्लू के बीच भी कुश्ती हुई। 5100 रुपये की इस कुश्ती में दोनों के बीच कड़ा संघर्ष देखने को मिला। काफी प्रयास के बावजूद कोई पहलवान निर्णायक बढ़त नहीं बना सका और मुकाबला बराबरी पर छूटा। इस दौरान दर्शक लगातार तालियां बजाकर दोनों का उत्साह बढ़ाते रहे।

बाल पहलवानों ने भी दिखाया हुनर
दंगल में बच्चों की कुश्तियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। विराट यादव, ओम, श्रेयांश यादव और आरेव यादव समेत कई बाल पहलवानों ने अखाड़े में उतरकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कम उम्र में बच्चों के आत्मविश्वास और कुश्ती के प्रति उत्साह ने दर्शकों को प्रभावित किया।

बाल पहलवानों को प्रोत्साहन के लिए आयोजकों की ओर से बर्तन और 101 रुपये नगद पुरस्कार दिए गए। वहीं बड़े पहलवानों को बाल्टी और 501 रुपये नगद देकर सम्मानित किया गया। आयोजकों ने बताया कि पुरस्कार का उद्देश्य खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाने के साथ नई पीढ़ी को पारंपरिक कुश्ती से जोड़ना है।

कुश्ती परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प
दंगल में संकटा प्रसाद यादव, सुनील यादव, श्रीराम फौजी, बाबूलाल यादव और रवि यादव समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। उन्होंने पहलवानों का उत्साहवर्धन किया और आयोजन को सफल बनाने में सहयोग दिया।

आयोजकों ने कहा कि नाग पंचमी पर होने वाले पारंपरिक दंगल भारतीय खेल और अखाड़ा संस्कृति को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे आयोजनों से बच्चों और युवाओं में कुश्ती के प्रति रुचि बढ़ती है। बचऊ वीर अखाड़े का दंगल भी इसी परंपरा को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास है। आयोजन के समापन पर पहलवानों, सहयोगियों और दर्शकों के प्रति आभार जताया गया।

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