नागपंचमी पर नगवा में पहलवानों ने दिखाई ताकत, जोड़ी-गदा और नाल का किया प्रदर्शन

WhatsApp Channel Join Now

 

वाराणसी। काशी की प्राचीन अखाड़ा परंपरा और नाग पंचमी के पर्व का अनूठा संगम सोमवार को नगवा स्थित हनुमान मंदिर और रविदास पार्क के समीप देखने को मिला। नाग पंचमी के पावन अवसर पर यहां पारंपरिक जोड़ी, गदा और नाल घुमाने के साथ ही भारी वजन उठाने तथा शक्ति प्रदर्शन की प्रतियोगिता आयोजित की गई। कार्यक्रम में स्थानीय पहलवानों के साथ दूर-दराज से पहुंचे पहलवानों ने अपनी शारीरिक क्षमता और पारंपरिक युद्धकला का प्रदर्शन किया। इस दौरान पूरा क्षेत्र 'हर-हर महादेव' और 'बजरंगबली की जय' के उद्घोष से गूंज उठा।

 

कार्यक्रम का शुभारंभ बजरंगबली के पूजन-अर्चन के साथ हुआ। हनुमान जी और अखाड़े की विधिवत पूजा के बाद पहलवानों ने मिट्टी के अखाड़े और पारंपरिक उपकरणों के बीच अपने हुनर का प्रदर्शन शुरू किया। किसी पहलवान ने भारी नाल उठाकर अपनी ताकत दिखाई तो किसी ने जोड़ी और गदा को तेजी से घुमाकर दर्शकों को रोमांचित कर दिया। पारंपरिक व्यायाम और शक्ति प्रदर्शन को देखने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और आसपास के क्षेत्रों से आए दर्शक मौजूद रहे।

123
पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा
आयोजन से जुड़े सतीश चंद्र यादव उर्फ झंटू सरदार ने बताया कि नगवा में नाग पंचमी के अवसर पर होने वाली यह प्रतियोगिता कोई नया आयोजन नहीं है, बल्कि कई पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा है। उन्होंने कहा कि उनके दादा-परदादा और पिता भी नाग पंचमी के दिन इस आयोजन को करते रहे हैं। अब परिवार की अगली पीढ़ी इस परंपरा को आगे बढ़ा रही है।

123
उन्होंने बताया कि नाग पंचमी के दिन यहां पहलवान अपनी ताकत और कला का प्रदर्शन करने पहुंचते हैं। जोड़ी, गदा और नाल जैसे पारंपरिक उपकरणों के प्रदर्शन के साथ भारी वजन उठाने की प्रतियोगिताएं भी होती हैं। आयोजन में क्षेत्रीय पार्षद रविंद्र सिंह, लंका थाना पुलिस के अधिकारी-कर्मचारी, साधु-संत और आसपास के गणमान्य लोग भी शामिल होते हैं। अतिथियों का स्वागत अंगवस्त्र प्रदान कर किया जाता है।

123
पिता से सीखी पहलवानी और परंपरा
आयोजन में शामिल रवि यादव ने बताया कि उन्होंने यह परंपरा अपने पिता से सीखी है। उनके दादा भी इस आयोजन को करते थे और उनके पिता ने भी वर्षों तक नाग पंचमी के मौके पर यहां शक्ति प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि उनके पिता उन चुनिंदा पहलवानों में शामिल थे जो कांटों वाली जोड़ी घुमाने में माहिर थे।


रवि यादव के अनुसार, समय के साथ कांटों वाली जोड़ी घुमाने वाले पहलवानों की संख्या कम होती जा रही है। ऐसे में नाग पंचमी के मौके पर होने वाला यह आयोजन नई पीढ़ी को इस पारंपरिक कला से जोड़ने का काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि आज भी दूर-दूर से पहलवान यहां पहुंचते हैं और अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं।

123
विदेशों से भी पहलवान पहुंचने का दावा
आयोजकों के अनुसार, नगवा में नाग पंचमी के अवसर पर होने वाला यह पारंपरिक शक्ति प्रदर्शन पिछले कई वर्षों से आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। आयोजन में देश के विभिन्न हिस्सों से पहलवान पहुंचते हैं। आयोजकों का दावा है कि समय-समय पर विदेशों से भी पहलवान यहां आकर अपनी ताकत और पारंपरिक खेल-कौशल का प्रदर्शन कर चुके हैं।

123
अखाड़ों की संस्कृति को जीवित रखने की कोशिश
काशी में नाग पंचमी का पर्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका गहरा संबंध अखाड़ों और पारंपरिक व्यायाम से भी रहा है। सदियों से इस अवसर पर पहलवान अखाड़ों में पहुंचकर कुश्ती, दंड-बैठक, गदा, जोड़ी, नाल और अन्य पारंपरिक उपकरणों के माध्यम से अपनी शक्ति का प्रदर्शन करते रहे हैं।

123
नगवा का यह आयोजन भी इसी प्राचीन परंपरा की कड़ी है। यहां हनुमान जी की पूजा के बाद पहलवानों द्वारा शक्ति प्रदर्शन किया जाता है। आयोजन के दौरान युवाओं और बच्चों में भी पारंपरिक व्यायाम तथा अखाड़ा संस्कृति के प्रति उत्साह देखने को मिला।


दर्शकों ने बढ़ाया पहलवानों का उत्साह
पहलवानों के प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे। जब कोई पहलवान भारी वजन उठाता या जोड़ी-गदा को तेजी से घुमाता तो दर्शक तालियों और जयकारों से उसका उत्साह बढ़ाते रहे। पूरे आयोजन स्थल पर धार्मिक आस्था और खेल भावना का अनूठा वातावरण बना रहा। आयोजकों का कहना है कि आधुनिक दौर में पारंपरिक खेलों और अखाड़ा संस्कृति को जीवित रखना बेहद जरूरी है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को न केवल अपनी पुरानी परंपराओं की जानकारी मिलती है, बल्कि शारीरिक व्यायाम, अनुशासन और मेहनत का महत्व भी समझ में आता है।

123
नाग पंचमी के अवसर पर नगवा में आयोजित यह शक्ति प्रदर्शन काशी की उस जीवंत परंपरा की तस्वीर पेश करता है, जिसमें भक्ति, व्यायाम, पहलवानी और लोक संस्कृति एक साथ दिखाई देती है। बजरंगबली के पूजन से शुरू हुआ आयोजन देर तक जोड़ी-गदा और नाल के प्रदर्शन तथा 'हर-हर महादेव' के जयघोष के बीच चलता रहा।

Share this story