जन्माष्टमी पर कान्हा स्वरूप बालक ने दिया प्रकृति बचाने का संदेश, नमामि गंगे ने स्वच्छता और सामाजिक सद्भाव के लिए किया जागरूक
वाराणसी। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के 5253वें महापर्व पर नमामि गंगे की ओर से कालभैरव क्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया गया। कार्यक्रम के दौरान क्षेत्रीय नागरिकों और श्रद्धालुओं को प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने तथा पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक एवं नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर राजेश शुक्ला ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन ज्ञान, भक्ति और कर्मयोग की शिक्षा के साथ प्रकृति प्रेम और पर्यावरण संरक्षण की प्रेरणा भी देता है। उन्होंने कहा कि जन्माष्टमी जैसे पावन पर्व पर लोगों को अपने घर, मंदिर और आसपास के क्षेत्रों में स्वच्छता बनाए रखने के साथ पौधरोपण का संकल्प लेना चाहिए।
उन्होंने सिंगल यूज पॉलिथीन के बढ़ते उपयोग से पर्यावरण पर पड़ रहे दुष्प्रभावों के प्रति भी लोगों को जागरूक किया। कहा कि प्लास्टिक का अत्यधिक इस्तेमाल धरती, जलस्रोतों और जीव-जंतुओं के लिए गंभीर खतरा बन रहा है। श्रद्धालुओं से अपील की गई कि पर्वों और धार्मिक आयोजनों में प्लास्टिक की सजावटी सामग्री के स्थान पर पर्यावरण अनुकूल विकल्पों का इस्तेमाल करें।

राजेश शुक्ला ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत की पूजा का संदेश प्रकृति संरक्षण की भारतीय परंपरा को दर्शाता है। पर्वत, पेड़-पौधे, नदियां और पशु-पक्षी मानव जीवन के आधार हैं। इनका संरक्षण प्रत्येक व्यक्ति की नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी है। कान्हा का बाल्यकाल यमुना तट, हरे-भरे वनों और गायों के बीच बीता, जो प्रकृति के साथ उनके गहरे आत्मीय संबंध को दर्शाता है।
कार्यक्रम के दौरान गंगा एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक किया गया। साथ ही स्वच्छ और हरित काशी के निर्माण में जनभागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया गया। बड़ी संख्या में क्षेत्रीय नागरिकों और श्रद्धालुओं ने कार्यक्रम में सहभागिता करते हुए पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।

