गुरु पूर्णिमा पर गंगा की गोद में गूंजे सुर, गंगोत्री क्रूज पर पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने ली कजरी की क्लास
मालिनी अवस्थी के सानिध्य में प्रतिभागियों ने दी कजरी, ठुमरी और दादरा की मनमोहक प्रस्तुतियां, गुरु-शिष्य परंपरा को आगे बढ़ाने का दिया संदेश
गुरु पूर्णिमा पर गंगोत्री क्रूज़ पर कजरी गायन कार्यशाला का भव्य समापन, मालिनी अवस्थी के निर्देशन में देश-विदेश के प्रतिभागियों ने दी शानदार प्रस्तुतियां
कजरी, ठुमरी और दादरा की प्रस्तुतियों से गूंजा गंगा का तट, मालिनी अवस्थी ने गुरुमाता पद्म विभूषण गिरिजा देवी को दी श्रद्धांजलि
"ज्ञान बांटने के लिए है"-गुरुमाता की सीख को बताया जीवन का मूल मंत्र, कार्यक्रम में अनेक विशिष्ट अतिथियों की रही गरिमामयी उपस्थिति
भारतीय लोक संगीत, संस्कृति और गुरु-शिष्य परंपरा के संरक्षण का दिया गया संदेश
वाराणसी। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर गंगोत्री क्रूज़ पर आयोजित कजरी गायन कार्यशाला का भव्य समापन भारतीय लोक संगीत, गुरु-शिष्य परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के उत्सव के रूप में संपन्न हुआ। देश-विदेश से आए प्रतिभागियों ने पद्मश्री मालिनी अवस्थी के मार्गदर्शन में कार्यशाला के दौरान सीखी गई कजरी, ठुमरी और दादरा की बारीकियों को मंच पर जीवंत प्रस्तुतियों के माध्यम से साकार किया। कलाकारों की सुमधुर प्रस्तुतियों ने उपस्थित संगीत प्रेमियों और काशी के कला अनुरागियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने अपनी पूज्य गुरुमाता एवं पद्म विभूषण गिरिजा देवी (अप्पा जी) को श्रद्धांजलि अर्पित कर किया। उन्होंने कहा कि अप्पा जी केवल महान गायिका ही नहीं, बल्कि भारतीय लोक और शास्त्रीय संगीत की अमूल्य धरोहर थीं। उनकी साधना और समर्पण ने भारतीय संगीत को वैश्विक पहचान दिलाई तथा असंख्य शिष्यों को संगीत की दिशा प्रदान की।
अपने विद्यार्थी जीवन को याद करते हुए मालिनी अवस्थी ने बताया कि उनकी गुरुमाता ने उन्हें सिखाया था कि "ज्ञान संभालकर रखने की नहीं, बल्कि बांटने की वस्तु है।" उन्होंने कहा कि यही प्रेरणा उन्हें हर वर्ष नई पीढ़ी को भारतीय लोक एवं शास्त्रीय संगीत का प्रशिक्षण देने के लिए प्रेरित करती है, ताकि गुरु-शिष्य परंपरा निरंतर आगे बढ़ती रहे।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों ने भारतीय लोक एवं शास्त्रीय संगीत की विभिन्न विधाओं का गहन अभ्यास किया। समापन समारोह में सभी विद्यार्थियों ने आत्मविश्वास और अनुशासन के साथ अपनी प्रस्तुतियां देकर खूब सराहना बटोरी। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि भारतीय लोक संगीत की समृद्ध परंपरा आज भी नई पीढ़ी के माध्यम से सशक्त रूप से आगे बढ़ रही है।
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में अशोक गुप्ता, मनीष खत्री, अंकिता खत्री मालवीय, सुनील विश्वकर्मा, राहुल चौधरी, धर्मनाथ मिश्रा, राजेश, रत्नेश, नीरज एवं अमित, मुकुंद शर्मा सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने इस आयोजन को भारतीय लोक संगीत और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताते हुए आयोजकों और प्रतिभागियों की सराहना की।

