वित्तीय वर्ष समाप्ति से पहले सक्रिय हों अधिकारी, लापरवाही पर वेतन से होगी वसूली, कृषि मंत्री ने दी सख्त हिदायत 

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वाराणसी। सर्किट हाउस सभागार में प्रदेश के कृषि, कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान मंत्री सूर्य प्रताप शाही की अध्यक्षता में कृषि विभाग की योजनाओं की वित्तीय प्रगति को लेकर मंडलीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में वाराणसी मंडल सहित चंदौली और गाजीपुर के कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान विभागीय योजनाओं के प्रगति और क्रियान्वयन पर चर्चा हुई। कृषि मंत्री ने अफसरों को हिदायत दी कि वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले सक्रिय हो जाएं। लापरवाही मिली तो उनके वेतन से वसूली की जाएगी। 

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बैठक के दौरान मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि वित्तीय वर्ष समाप्त होने में अब बहुत कम समय बचा है, ऐसे में सभी अधिकारी पूरी ऊर्जा और जिम्मेदारी के साथ कार्य करें। उन्होंने चेतावनी दी कि जिन योजनाओं में किसी प्रकार की वित्तीय देनदारी (लायबिलिटी) शेष रह जाएगी या आवंटित बजट का समय से उपयोग नहीं होगा, तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए उनके वेतन से वसूली की जाएगी।

समीक्षा के दौरान जायद 2026 के तहत हाइब्रिड मक्का वितरण की प्रगति संतोषजनक नहीं पाई गई। चंदौली और गाजीपुर में लक्ष्य के सापेक्ष कम वितरण होने पर मंत्री ने अधिकारियों को शत-प्रतिशत लक्ष्य पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही उर्द और मूंग के बीज वितरण की समीक्षा करते हुए आवश्यकतानुसार तत्काल अतिरिक्त मांग भेजने और मिनीकिट वितरण के बाद स्थलीय निरीक्षण करने को कहा।

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मंत्री ने विभिन्न योजनाओं—जैसे एग्री जंक्शन, ऑयल सीड्स, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, आत्मनिर्भर कृषक योजना, नेचुरल फार्मिंग, किसान पाठशाला, मिलेट्स पुनरोद्धार, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और नेशनल फूड सिक्योरिटी मिशन—की प्रगति की गहन समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिया कि जिन योजनाओं में वित्तीय प्रगति कम है, उनमें तेजी लाकर 100 प्रतिशत बजट खर्च सुनिश्चित किया जाए और जहां बजट कम है, वहां तत्काल अतिरिक्त बजट की मांग की जाए।

फार्मर रजिस्ट्री के तहत भी वाराणसी, चंदौली और गाजीपुर में निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले प्रगति अधूरी पाई गई, जिसे शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए गए। मंत्री ने कहा कि भविष्य में किसानों को मिलने वाले लाभ इसी रजिस्ट्री के आधार पर निर्धारित होंगे। इसके अलावा, अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि बीज और कृषि यंत्रों पर मिलने वाले अनुदान की जानकारी किसानों तक अधिक से अधिक पहुंचाई जाए।

अप्रैल 2026 में केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) अभियान चलाकर अधिक से अधिक किसानों को इससे जोड़ा जाए। साथ ही फसल बीमा योजना में प्रीमियम कटौती के मामलों की जांच कर जरूरत पड़ने पर संबंधित बैंकों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया। बैठक में अधिकारियों को आगामी खरीफ सीजन 2026-27 की तैयारियों पर भी विशेष ध्यान देने और गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

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