NSUI ने साइकिल यात्रा को काशी विद्यापीठ गेट पर रोके जाने से आक्रोश, प्रदेश अध्यक्ष ने लगाए गंभीर आरोप

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वाराणसी। नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) ने अपने 56वें स्थापना दिवस पर शहर में ‘गांधीवादी’ साइकिल यात्रा निकालकर छात्र हितों से जुड़े मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया। प्रदेश अध्यक्ष ऋषभ पांडेय के नेतृत्व में आयोजित यह यात्रा शास्त्री घाट से प्रारंभ होकर हरिश्चंद्र पीजी कॉलेज, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय होते हुए महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ तक पहुंची। काशी विद्यापीठ गेट पर साइकिल यात्रा को रोके जाने से कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति देखने को मिली। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। 

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प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि यात्रा का उद्देश्य विश्वविद्यालयों में छात्रों के कथित दमन, बढ़ती फीस और लगातार सामने आ रहे पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों के खिलाफ विरोध दर्ज कराना था। मीडिया से बातचीत में प्रदेश अध्यक्ष ऋषभ पांडेय ने कहा कि शिक्षा संस्थानों में छात्रों की आवाज को दबाया जा रहा है और उनके अधिकारों का हनन हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक स्तर पर छात्रों के साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार किया जा रहा है, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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साइकिल यात्रा जब महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के मुख्य द्वार पर पहुंची, तो विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कार्यकर्ताओं को अंदर जाने से रोक दिया गया। इस दौरान कुछ समय के लिए स्थिति तनावपूर्ण हो गई और मौके पर हल्का गतिरोध देखने को मिला। हालांकि बाद में स्थिति नियंत्रित कर ली गई। ऋषभ पांडेय ने कहा कि जिस विश्वविद्यालय की स्थापना महात्मा गांधी के आदर्शों पर हुई, वहां शांतिपूर्ण और गांधीवादी तरीके से विरोध कर रहे छात्रों को रोकना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग विचारधारा विशेष से प्रभावित होकर छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने का प्रयास कर रहे हैं।

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इस मौके पर NSUI नेताओं ने अपनी प्रमुख मांगें भी सामने रखीं। उन्होंने विश्वविद्यालयों में छात्रों के मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न को तत्काल बंद करने, पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। इसके अलावा बढ़ी हुई फीस को वापस लेने और छात्रसंघ चुनाव समय पर कराए जाने की भी मांग उठाई गई। कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और गांधीवादी सिद्धांतों पर आधारित रहेगा। उन्होंने कहा कि जब तक छात्रों की समस्याओं का समाधान नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

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