“पैसा नहीं, सेवा मेरा लक्ष्य” : BHU के वरिष्ठ डॉक्टर ने खोली सिस्टम की परतें, लगाए व्हिसलब्लोअर होने की सजा मिलने के गंभीर आरोप
वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के कार्डियोलॉजी विभाग से जुड़े डॉक्टर ओम शंकर ने एक भावुक और गंभीर बयान जारी करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य कभी पैसा कमाना नहीं, बल्कि गरीब और वंचित मरीजों की सेवा करना रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि BHU में वर्षों से भ्रष्टाचार और प्रशासनिक बाधाओं के चलते स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं और उन्हें सच उजागर करने की सजा दी जा रही है।

व्यक्तिगत दर्द बना सेवा का संकल्प
डॉ. ओम शंकर ने बताया कि उनके छोटे भाई की मौत सिर्फ इसलिए हो गई क्योंकि इलाज के लिए पैसे नहीं थे। इसी घटना ने उन्हें डॉक्टर बनने और समाज सेवा के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि निजी संस्थानों में बेहतर वेतन और सुविधाओं के बावजूद उन्होंने BHU को इसलिए चुना, ताकि गरीबों का इलाज कर सकें।
BHU में शुरुआत: सीमित सुविधाएं, नकारात्मक छवि
उन्होंने बताया कि जब वह BHU पहुंचे, तब कार्डियोलॉजी विभाग में सप्ताह में केवल तीन OPD होती थीं और सीमित मरीज ही देखे जाते थे। उस समय न एंजियोग्राफी की सुविधा थी और न ही एंजियोप्लास्टी—यहां तक कि BHU के 100 वर्षों के इतिहास में यह प्रक्रियाएं कभी नहीं हुई थीं। उन्होंने इस स्थिति को बदलने का संकल्प लिया और इंटरवेंशन कार्डियोलॉजी प्रोग्राम की शुरुआत की।
पहली एंजियोग्राफी के दौरान साजिश का आरोप
डॉ. शंकर ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने पहली एंजियोग्राफी की, तो उनके खिलाफ साजिश रची गई। उन्होंने दावा किया कि मरीज को अत्यधिक मात्रा में ब्लड थिनर दिया गया, जिससे जान का खतरा पैदा हो गया। हालांकि उन्होंने घंटों मेहनत कर मरीज की जान बचाई। बाद में जांच में उन्हें निर्दोष पाया गया, लेकिन उन्हें आगे काम न करने की चेतावनी दी गई।
पहली एंजियोप्लास्टी: जोखिम उठाकर बचाई मरीज की जान
उन्होंने बताया कि 2011 में एक हार्ट अटैक मरीज की जान बचाने के लिए उन्होंने BHU में पहली एंजियोप्लास्टी की। यह BHU के इतिहास में एक महत्वपूर्ण कदम था। इस उपलब्धि को मीडिया में भी प्रमुखता से प्रकाशित किया गया और बाद में विश्वविद्यालय प्रशासन से आधिकारिक अनुमति भी मिली।
AIIMS स्तर की सुविधाओं के लिए आंदोलन
डॉ. शंकर ने कहा कि उन्होंने BHU में AIIMS जैसी सुविधाएं लाने के लिए आंदोलन किया, जिसके चलते उन्हें निलंबन और अनशन तक करना पड़ा। इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर समर्थन मिला और इसके परिणामस्वरूप स्वास्थ्य क्षेत्र में कई बड़े फैसले लिए गए, जिनमें नए AIIMS की स्थापना और आयुष्मान भारत जैसी योजनाएं शामिल हैं।
अनुदान के बाद भ्रष्टाचार के आरोप
उन्होंने आरोप लगाया कि BHU को बड़े पैमाने पर अनुदान मिलने के बाद अस्पताल में भ्रष्टाचार बढ़ गया। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे को बिना जरूरत तोड़ा गया, नियमों के विरुद्ध अधिकारियों को लंबे समय तक पद पर बनाए रखा गया और मरीजों को मिलने वाली मुफ्त सुविधाएं भी प्रभावित हुईं।
व्हिसलब्लोअर होने की सजा मिलने का आरोप
डॉ. ओम शंकर ने कहा कि जब उन्होंने इन अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाई, तो उनके खिलाफ गैरकानूनी और प्रतिशोधपूर्ण कार्रवाई की गई। उन्होंने दावा किया कि उन्हें बार-बार जांच और नोटिस देकर परेशान किया जा रहा है, जबकि पहले की जांच में उन्हें निर्दोष पाया जा चुका है।
सरकार और प्रशासन से रखीं प्रमुख मांगें
डॉ. शंकर ने अपनी मांगों में कहा कि उनके खिलाफ सभी अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस ली जाए, भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच हो, कार्डियोलॉजी विभाग को आवश्यक संसाधन दिए जाएं और मरीजों को मुफ्त दवा व भोजन की सुविधा दोबारा शुरू की जाए।
“गरीब मरीजों के लिए लड़ाई जारी रहेगी”
अंत में उन्होंने कहा कि जब तक कोई भी गरीब व्यक्ति पैसे के अभाव में इलाज से वंचित रहेगा, तब तक वह चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि मरीजों की सेवा के खिलाफ किसी भी अवैध आदेश को मानना उनके लिए संभव नहीं है।
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