New Year 2026 :  नववर्ष पर गंगा में लगाई आस्था की डुबकी, सूर्य को दिया अर्घ्य, दान कर कमाया पुण्य   

WhatsApp Channel Join Now

वाराणसी। नववर्ष पर काशी में आस्था और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। जहां एक ओर नववर्ष की पूर्व संध्या पर पूरा शहर जश्न और उल्लास में डूबा रहा, वहीं गुरुवार की सुबह होते ही काशी की पहचान कहे जाने वाले धर्म, अध्यात्म और सनातन परंपरा का अनुपम दृश्य सामने आया। भोर होते ही श्रद्धालु मां गंगा के घाटों की ओर उमड़ पड़े और पवित्र स्नान के साथ नववर्ष की शुरुआत की।

123

अस्सी घाट, तुलसी घाट, केदार घाट सहित अन्य प्रमुख घाटों पर तड़के से ही श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली। ठंड के बावजूद लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ। “हर-हर महादेव” और “जय मां गंगे” के जयघोष के बीच श्रद्धालुओं ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। माना जाता है कि नववर्ष के दिन गंगा स्नान करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और वर्षभर सुख-शांति बनी रहती है। इसी विश्वास के साथ श्रद्धालु परिवार सहित घाटों पर पहुंचे।

123

गंगा स्नान के उपरांत लोगों ने भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया और उगते सूर्य को नमन कर प्रातः वंदन किया। मंत्रोच्चार और शंखनाद के बीच घाटों का वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक हो गया। कई श्रद्धालु स्नान के बाद घाटों पर बैठकर ध्यान और साधना करते नजर आए, तो कुछ ने गंगा तट पर पूजा-अर्चना कर मां गंगा से परिवार और समाज के कल्याण की कामना की।

123

नववर्ष के उपलक्ष्य में श्रद्धालुओं ने विशेष संकल्प भी लिया। लोगों का कहना था कि नया वर्ष केवल उत्सव का नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और जीवन को सही दिशा देने का अवसर है। कई श्रद्धालुओं ने संकल्प लिया कि वे सदैव सत्य और धर्म के मार्ग पर चलेंगे, समाज और लोगों के हित के बारे में सोचेंगे तथा अपने आचरण से सनातन मूल्यों को आगे बढ़ाएंगे। इस अवसर पर बुजुर्गों के साथ बड़ी संख्या में युवा भी गंगा स्नान और पूजन में शामिल हुए, जो काशी की सांस्कृतिक निरंतरता को दर्शाता है।

शहर में सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन और पुलिस की ओर से भी पुख्ता इंतजाम किए गए थे। घाटों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती रही और गोताखोरों की टीम भी अलर्ट मोड पर मौजूद रही, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। नववर्ष की सुबह काशी में धर्म और आस्था का विशेष रंग देखने को मिला।

Share this story