वाराणसी समेत कई जिलों में नई व्यवस्था, राष्ट्रीय जलमार्ग-1 पर बढ़ेगा जल परिवहन, 16 स्थानों पर जेटी निर्माण प्रस्तावित
वाराणसी। राष्ट्रीय जलमार्ग-1 के तहत गंगा किनारे बसे जिलों में जल परिवहन को बढ़ावा देने और उसकी नियमित निगरानी के लिए जल परिवहन समिति का गठन किया जाएगा। इसके साथ ही जेटी निर्माण, कार्गो और नाव संचालन की सुव्यवस्थित व्यवस्था विकसित की जाएगी। उत्तर प्रदेश अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) ने इस दिशा में आवश्यक निर्देश जारी किए हैं।
वाराणसी समेत कई जिलों में प्रस्तावित हैं जेटी
प्राधिकरण के अनुसार, वाराणसी, गाजीपुर, बलिया, सेदपुर, चंदौली और प्रयागराज समेत कई स्थानों पर कुल 16 जेटी निर्माण का प्रस्ताव है। इनमें वाराणसी और गाजीपुर में जेटी निर्माण का कार्य शुरू भी किया जा चुका है। इन जेटियों के माध्यम से यात्री और कार्गो परिवहन को सुगम बनाया जाएगा।
8 जेटी का निर्माण शुरू, निगरानी के लिए बनेगी समिति
अभी तक आठ जेटी के निर्माण कार्य की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। जलमार्ग के संचालन और निगरानी के लिए संबंधित जिलों में जल परिवहन समिति बनाई जाएगी। वाराणसी में इसका कार्यालय आईडब्ल्यूएआई परिसर में स्थापित किया जाएगा। समिति में प्राधिकरण, जिला प्रशासन, परिवहन, राजस्व विभाग और नाविक संघ के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
छोटे कार्गो हब पर भी जोर
अधिकारियों के मुताबिक तटीय इलाकों को जोड़ने के लिए छोटे-छोटे कार्गो हब विकसित किए जाएंगे। इससे स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और माल ढुलाई का खर्च कम होगा। बिहार से प्रयागराज के बीच छोटे कार्गो हब विकसित करने की भी तैयारी है। इसके लिए सभी जनपदों में जेटी और कार्गो सेंटर खोले जाएंगे।
ड्रेजिंग और चैनल चौड़ीकरण का कार्य जारी
वाराणसी क्षेत्र में चैनल ड्रेजिंग का काम शुरू हो चुका है। ड्रेजिंग के बाद गंगा में नौवहन के लिए 45 मीटर चौड़ा और 3.25 मीटर गहरा जलमार्ग तैयार किया जा रहा है। इससे छोटे-बड़े जलयान सुरक्षित रूप से संचालित हो सकेंगे। वर्तमान में बलिया और गाजीपुर में भी ड्रेजिंग कार्य चल रहा है।
जल परिवहन को मिलेगा नया आयाम
सरकार की इस पहल से गंगा में जल परिवहन को नया आयाम मिलने की उम्मीद है। यात्री परिवहन के साथ-साथ माल ढुलाई को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे सड़क और रेल मार्ग पर दबाव कम होगा और पर्यावरणीय दृष्टि से भी यह कदम लाभकारी माना जा रहा है।

