वाराणसी, भोपाल समेत यूपी-एमपी के कई जिलों में NDRF की मेगा मॉक ड्रिल, आपदा से निपटने की दिखी हाई अलर्ट तैयारी

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वाराणसी। देश में किसी भी प्राकृतिक अथवा मानवजनित आपदा की स्थिति में त्वरित राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारी परखने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) ने बुधवार को उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई संवेदनशील जिलों में व्यापक मोबिलाइजेशन ड्रिल और मॉक अभ्यास आयोजित किया।

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उप महानिरीक्षक मनोज कुमार शर्मा के दिशा-निर्देशन में यह अभ्यास उत्तर प्रदेश के वाराणसी, गाज़ीपुर, मिर्जापुर, जौनपुर, लखनऊ, गोरखपुर और प्रतापगढ़ के साथ-साथ मध्य प्रदेश के विदिशा और भोपाल में आयोजित किया गया।

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अभ्यास का मुख्य उद्देश्य बाढ़ राहत कार्यों में एनडीआरएफ टीमों के रिस्पॉन्स टाइम, तैयारी और राहत-बचाव क्षमता का परीक्षण करना था। विभिन्न परिदृश्यों पर आधारित इस मॉक ड्रिल में नाव पलटने, नदी में डूबने, रासायनिक एवं जैविक आपदा, भूकंप और भवन ध्वस्त होने जैसी परिस्थितियों को शामिल किया गया।

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इस दौरान एनडीआरएफ की विशेषीकृत फ्लड वाटर रेस्क्यू, कॉलैप्स्ड स्ट्रक्चर सर्च एंड रेस्क्यू तथा केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल एंड न्यूक्लियर (CBRN) टीमों ने आधुनिक उपकरणों के साथ राहत एवं बचाव अभियान चलाया। घटनास्थलों पर पहुंचते ही टीमों ने ऑपरेशन बेस स्थापित कर घायलों को सुरक्षित बाहर निकाला और प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल पहुंचाया।

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मॉक अभ्यास के दौरान जिला प्रशासन, एसडीआरएफ, पुलिस, जल पुलिस, फायर ब्रिगेड, स्वास्थ्य विभाग और अन्य एजेंसियों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विशेष जोर दिया गया। पूरे ऑपरेशन में इंसिडेंट रिस्पॉन्स सिस्टम के दिशा-निर्देशों का पालन किया गया।

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उप महानिरीक्षक मनोज कुमार शर्मा ने कहा कि किसी भी आपदा में जोखिम को कम करना एनडीआरएफ की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि इस बड़े अभ्यास में एनडीआरएफ की 12 टीमों को तैनात किया गया था, जो अत्याधुनिक राहत एवं बचाव उपकरणों से लैस हैं और हर प्रकार की आपदा से निपटने में सक्षम हैं।

अभ्यास के समापन पर सभी संबंधित विभागों ने संयुक्त समीक्षा बैठक कर भविष्य में बेहतर समन्वय और आपदा तैयारियों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

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