IIT BHU में खनन उद्योग की चुनौतियों पर राष्ट्रीय मंथन, सुरक्षा और तकनीकी नवाचार पर जोर
वाराणसी। IIT BHU के खनन अभियांत्रिकी विभाग में शुक्रवार से “वर्तमान खनन उद्योग की समस्याएं एवं चुनौतियां” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारम्भ हुआ। इस कार्यशाला का संयुक्त आयोजन आईआईटी (बीएचयू) के खनन अभियांत्रिकी विभाग एवं महानिदेशालय खान सुरक्षा (DGMS), धनबाद द्वारा किया जा रहा है। कार्यशाला में देशभर से शिक्षाविदों, उद्योग विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और नियामक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलन, पुष्पांजलि और स्मृति चिन्ह वितरण के साथ हुआ। इसके बाद कुलगीत प्रस्तुत किया गया। उद्घाटन सत्र में उपस्थित अतिथियों ने खनन उद्योग में उभरती चुनौतियों, तकनीकी बदलावों और सुरक्षा मानकों पर विस्तार से चर्चा की।
प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए खनन अभियांत्रिकी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. राजेश राय ने कहा कि खनन क्षेत्र तेजी से बदल रहा है और नई चुनौतियों का समाधान सामूहिक विमर्श एवं अनुसंधान के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने सुरक्षित और सतत खनन पद्धतियों को समय की आवश्यकता बताया।
कार्यशाला के संयोजक प्रो. सुप्रकाश गुप्ता ने अपने संबोधन में प्रौद्योगिकी आधारित और पर्यावरण अनुकूल खनन प्रणाली पर जोर दिया। वहीं डीजीएमएस के उप महानिदेशक एवं कार्यशाला के सह-संयोजक श्री नीरज कुमार ने आधुनिक खनन कार्यों में सुरक्षा मानकों और नियामकीय अनुपालन की महत्ता को विस्तार से समझाया।
मुख्य अतिथि के रूप में डीजीएमएस, धनबाद के महानिदेशक श्री उज्ज्वल टाह ने कहा कि वर्तमान समय में खनन उद्योग अनेक तकनीकी और पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रहा है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए तकनीकी हस्तक्षेप, व्यावसायिक सुरक्षा और प्रभावी नीतिगत सुधार आवश्यक हैं।
आईआईटी (बीएचयू) के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने अपने संरक्षक उद्बोधन में कहा कि यह कार्यशाला उद्योग और शिक्षाविदों के बीच संवाद का महत्वपूर्ण मंच बनेगी। उन्होंने कहा कि संस्थान खनन एवं संबद्ध क्षेत्रों में अनुसंधान और तकनीकी उन्नयन को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।
कार्यशाला के दौरान दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें डीजीएमएस, कोल इंडिया लिमिटेड, केपीएमजी और अन्य संस्थानों के विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे। पैनल चर्चाओं में खनन सुरक्षा, आधुनिक तकनीक, पर्यावरण संरक्षण और उद्योग की चुनौतियों पर गंभीर मंथन हुआ।
सांस्कृतिक गतिविधियों के तहत प्रतिभागियों ने अस्सी घाट का भ्रमण किया तथा दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती का दर्शन किया। दूसरे दिन भी विभिन्न तकनीकी सत्रों, व्याख्यानों और पैनल चर्चाओं का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देश के कई वरिष्ठ विशेषज्ञ भाग लेंगे।

