बकरीद से पहले बेनिया बकरा मंडी में उमड़ने लगे खरीदार, रोजाना 700 से ज्यादा बकरों की बिक्री

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वाराणसी। बकरीद का पर्व नजदीक आते ही शहर की प्रसिद्ध बेनिया बकरा मंडी में सुबह से देर रात तक मंडी में खरीदारों और व्यापारियों की भारी भीड़ उमड़ रही है। कुर्बानी के लिए लोग अपनी पसंद और बजट के अनुसार बकरों की खरीदारी कर रहे हैं। मंडी में प्रतिदिन 700 से अधिक बकरों की बिक्री हो रही है, जिससे यहां का कारोबार लगातार बढ़ता जा रहा है।

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मंडी में इस समय उत्तर प्रदेश के कई जिलों से व्यापारी और पशुपालक पहुंचे हुए हैं। प्रयागराज, कानपुर, लखनऊ, मिर्जापुर, गाजीपुर, मऊ और अकबरपुर समेत कई क्षेत्रों से लाए गए बकरे खरीदारों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। यहां छोटे आकार के सामान्य बकरों से लेकर भारी वजन और विशेष नस्ल वाले महंगे बकरे भी बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। मंडी में आने वाले लोग खास तौर पर स्वस्थ और अच्छी नस्ल के बकरों की तलाश कर रहे हैं।

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मंडी संचालक साजिद खान ने बताया कि इस वर्ष मंडी 27 मई तक संचालित होगी और आने वाले दिनों में भीड़ और बढ़ने की संभावना है। उन्होंने बताया कि अनुमानित रूप से अगले 10 दिनों में 6 से 7 हजार बकरों की बिक्री हो सकती है। उनके अनुसार बकरीद केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक भाईचारे और परंपराओं का प्रतीक भी है। लोग अपनी क्षमता के अनुसार कुर्बानी के लिए बकरे खरीदते हैं और इस अवसर को उत्साह के साथ मनाते हैं।

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मंडी में हर वर्ग के लोगों के लिए अलग-अलग कीमतों में बकरे उपलब्ध हैं। सामान्य नस्ल के बकरे 5 हजार से 15 हजार रुपये तक बिक रहे हैं, जबकि अच्छी नस्ल और अधिक वजन वाले बकरों की कीमत 50 हजार से लेकर एक लाख रुपये या उससे अधिक तक पहुंच रही है। खास नस्लों में जमुनापारी, सिरोही और बरबरी बकरों की मांग सबसे ज्यादा देखी जा रही है। कई खरीदार पहले से ही पसंदीदा बकरों की बुकिंग करा रहे हैं ताकि उन्हें मनचाहा पशु मिल सके।

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बच्चों और युवाओं में भी मंडी को लेकर खास उत्साह दिखाई दे रहा है। लोग परिवार के साथ मंडी पहुंचकर बकरों को देख रहे हैं और उनकी कीमत व नस्ल के बारे में जानकारी ले रहे हैं। कई जगहों पर बकरों को सजाकर भी रखा गया है, जिससे मंडी का आकर्षण और बढ़ गया है।

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भीड़ को देखते हुए मंडी में सुरक्षा और साफ-सफाई की विशेष व्यवस्था की गई है। स्थानीय प्रशासन और मंडी समिति की ओर से लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था या विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो। व्यापारियों का कहना है कि बेनिया बकरा मंडी केवल खरीद-फरोख्त का केंद्र नहीं, बल्कि वाराणसी की वर्षों पुरानी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का हिस्सा बन चुकी है। बकरीद से पहले यहां लगने वाली यह मंडी लोगों की आस्था, परंपरा और सामाजिक जुड़ाव को मजबूत करने का काम करती है।

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