नक्सली कमांडर ब्रजेश गंझू के खिलाफ दर्ज थे 50 से अधिक मुकदमे, 20 साल से था फरार, काफी दिनों से तलाश रही थी ATS और NIA
30 लाख रुपये का था इनाम, लंका मैदान के पास एटीएस से मुठभेड़ हुई पिस्टल और कार्बाइन से झोंका फायर, सीओ और सिपाही को भी लगी गोली, बुलेटप्रूफ जैकेट ने बचाई जान
दो पिस्टल, कार्बाइन, कारतूस और एक लाख रुपये नकद बरामद, झारखंड में हत्या, अपहरण, रंगदारी समेत संगीन अपराधों में था वांछित
वाराणसी। उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ते (यूपी-एटीएस) ने रविवार को वाराणसी में मुठभेड़ के दौरान प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन टीएसपीसी प्रमुख ब्रजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता उर्फ सरदार जी को मार गिराया। उस पर 30 लाख रुपये का इनाम घोषित था। एटीएस के मुताबिक, लंका मैदान के पास हुई मुठभेड़ में ब्रजेश को गोली लगी। उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। मुठभेड़ के दौरान एटीएस टीम का नेतृत्व कर रहे पुलिस उपाधीक्षक विपिन कुमार राय और मुख्य आरक्षी जितेंद्र कृष्ण को भी गोली लगी, लेकिन बुलेटप्रूफ जैकेट पहने होने के कारण दोनों सुरक्षित बच गए। ब्रजेश का दूसरा साथी मौके से भाग निकला।
वाराणसी में प्रवेश की मिली थी सूचना
यूपी-एटीएस के अनुसार, खुफिया सूचनाएं मिल रही थीं कि झारखंड के नक्सली उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रवेश कर सकते हैं। इसके मद्देनजर एटीएस की टीमें लगातार भौतिक और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के जरिए निगरानी कर रही थीं। इसी क्रम में सूचना मिली कि टीएसपीसी का सुप्रीमो ब्रजेश गंझू अपने एक साथी के साथ भेष बदलकर विभिन्न राज्यों में छिप रहा है और वाराणसी की ओर आ सकता है। इसके बाद एटीएस की विभिन्न टीमों को वाराणसी से जुड़े मिर्जापुर और सोनभद्र के सीमावर्ती क्षेत्रों सहित संभावित आवागमन मार्गों पर सक्रिय किया गया।
रविवार को सूचना मिली कि ब्रजेश वाराणसी क्षेत्र में प्रवेश कर चुका है और रामनगर थाना क्षेत्र के लंका मैदान की ओर जा रहा है। इस पर एटीएस की टीमें लंका मैदान के आसपास सक्रिय हो गईं।

रोकने पर एटीएस टीम पर की फायरिंग
एटीएस के मुताबिक, लंका मैदान के पास जीटी रोड की ओर से एक मोटरसाइकिल पर दो लोग आते दिखाई दिए। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें रोकने का प्रयास किया गया तो दोनों ने एटीएस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाब में टीम ने आत्मरक्षा में गोली चलाई। मुठभेड़ के दौरान ब्रजेश गंझू घायल हो गया, जबकि उसका साथी भाग निकला। घायल ब्रजेश को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
30 लाख रुपये का था इनाम
एटीएस के अनुसार, ब्रजेश गंझू पर कुल 30 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इसमें पांच लाख रुपये राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और 25 लाख रुपये झारखंड पुलिस की ओर से घोषित किए गए थे। वह एनआईए के दो मामलों आरसी-6/2018 और आरसी-22/2018 में वांछित था। पुलिस के मुताबिक, ब्रजेश करीब 20 वर्षों से फरार चल रहा था। वह पहले नक्सली संगठन सीपीआई (माओवादी) से जुड़ा था और बाद में टीएसपीसी का सुप्रीमो बनकर उग्रवादी गतिविधियों में सक्रिय रहा।
हत्या, अपहरण और रंगदारी समेत 50 से अधिक मुकदमे
ब्रजेश गंझू के आपराधिक इतिहास से संबंधित पुलिस दस्तावेज के अनुसार, उसके खिलाफ 50 से अधिक अभियोग पंजीकृत थे। उपलब्ध विवरण में हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, आपराधिक षड्यंत्र, रंगदारी, आगजनी, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, लोकसेवकों पर हमले तथा अवैध हथियार और विस्फोटक रखने से संबंधित मामले शामिल हैं। उसके खिलाफ यूएपीए की धाराओं में भी मुकदमे दर्ज थे।
दो पिस्टल, कार्बाइन और नकदी बरामद
एटीएस की ओर से जारी प्रेस नोट में मुठभेड़ के बाद बरामदगी का भी उल्लेख किया गया है। मौके से दो पिस्टल, एक कार्बाइन, भारी मात्रा में कारतूस और एक लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं। मामले में आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।

