काशी में जूना अखाड़े की 500 शाखाओं के 1000 से अधिक संत-महंतों का होगा जमावड़ा, कुंभ की तैयारियों पर होगी चर्चा
वाराणसी। वर्ष 2027 में हरिद्वार में आयोजित होने वाले अर्धकुंभ और नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों ने अब गति पकड़ ली है। देश की धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र काशी के अखाड़ों ने भी व्यापक स्तर पर अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। संतों के प्रवास, टेंट निर्माण, भूमि आवंटन, भोजन व्यवस्था, कोठारियों की रवानगी और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर लगातार मंथन किया जा रहा है। इसी क्रम में 12 जुलाई को काशी स्थित जूना अखाड़े के प्रधान कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित होगी, जिसमें कुंभ की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा के साथ विभिन्न जिम्मेदारियों का बंटवारा किया जाएगा।

बैठक में जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद महाराज की उपस्थिति प्रस्तावित है। इसके अलावा देशभर में फैली जूना अखाड़े की 500 से अधिक शाखाओं से एक हजार से अधिक महामंडलेश्वर, श्रीमहंत और प्रतिनिधि भाग लेंगे। नेपाल से भी प्रतिनिधियों के पहुंचने की संभावना है, जबकि कुछ संत ऑनलाइन माध्यम से बैठक में शामिल होंगे। बैठक में अखाड़े की 52 सदस्यीय समिति भी मौजूद रहेगी, जो आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा को अंतिम रूप देगी।
जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष मोहन भारती ने बताया कि हरिद्वार में अखाड़ों के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया जारी है। नवंबर तक टेंट, संतों के शिविर और अन्य अस्थायी ढांचों का निर्माण पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद विभिन्न अखाड़ों के संतों, महामंडलेश्वरों और नागा साधुओं के जत्थे चरणबद्ध तरीके से हरिद्वार पहुंचने लगेंगे। वहां वे शाही स्नान, धार्मिक अनुष्ठानों, तप, साधना और प्रवचनों में भाग लेंगे।

उन्होंने बताया कि बैठक में संतों के आवास, भोजन, सुरक्षा, परिवहन, चिकित्सा सुविधाओं, टेंट निर्माण, कोठारियों की रवानगी तथा कुंभ क्षेत्र में विभिन्न व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। साथ ही अखाड़े के वरिष्ठ पदाधिकारियों और विभिन्न समितियों की जिम्मेदारियां भी तय की जाएंगी, ताकि आयोजन के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।
जूना अखाड़े के अलावा काशी के अन्य प्रमुख अखाड़ों ने भी अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। काशी के 13 प्रमुख अखाड़ों में से आठ के प्रधान कार्यालय यहीं स्थित हैं, जबकि शेष अखाड़ों की महत्वपूर्ण शाखाएं शहर में संचालित होती हैं। निरंजनी, आह्वान, अटल, निर्वाणी, अग्नि, आनंद और वैष्णव अखाड़ों में भी बैठकों का दौर शुरू हो चुका है। सभी अखाड़े अपने-अपने शिविरों, संतों के प्रवास और धार्मिक आयोजनों की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।

मोहन भारती ने बताया कि नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ में भारी वर्षा सबसे बड़ी चुनौती होती है, क्योंकि यह आयोजन सावन-भादो के दौरान होता है। ऐसे में मजबूत टेंट, जल निकासी, सुरक्षित आवास और अन्य आधारभूत सुविधाओं की विशेष व्यवस्था करनी पड़ती है। उन्होंने बताया कि कुछ अखाड़ों के नासिक में स्थायी भवन पहले से मौजूद हैं, जिनका उपयोग कुंभ के दौरान किया जाएगा।
हरिद्वार अर्धकुंभ का आयोजन वर्ष 2027 में 14 जनवरी (मकर संक्रांति) से 20 अप्रैल (चैत्र पूर्णिमा) तक प्रस्तावित है, जिसमें 10 प्रमुख शाही एवं पारंपरिक स्नान होंगे। वहीं नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ का औपचारिक शुभारंभ ध्वजारोहण के साथ होगा और मुख्य धार्मिक आयोजन अगस्त से सितंबर 2027 के बीच संपन्न होंगे। संतों का कहना है कि कुंभ केवल आस्था का पर्व नहीं, बल्कि भारतीय सनातन परंपरा, संत संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का सबसे बड़ा संगम है। इसी भावना के साथ सभी अखाड़े समन्वित रूप से तैयारियों में जुटे हैं, ताकि श्रद्धालुओं को सुव्यवस्थित और दिव्य कुंभ का अनुभव मिल सके।

