वाराणसी को ₹25 हजार करोड़ की ऐतिहासिक सौगात, दो एलिवेटेड कॉरिडोर को मोदी कैबिनेट से मिली मंजूरी
वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी को केंद्र सरकार ने बड़ी सौगात दी है। केंद्रीय कैबिनेट ने करीब ₹25 हजार करोड़ की लागत से बनने वाले दो मेगा एलिवेटेड कॉरिडोर को मंजूरी दे दी है। लगभग 46 किलोमीटर लंबे इन कॉरिडोर के निर्माण से शहर की ट्रैफिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। परियोजना का उद्देश्य शहर के भीतर जाम की समस्या कम करना, यात्रा को तेज और सुगम बनाना तथा काशी आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर यातायात सुविधा उपलब्ध कराना है।
वरुणा नदी के किनारे बनेगा पहला एलिवेटेड कॉरिडोर
शहर दक्षिणी विधायक एवं पूर्व मंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी के अनुसार, पहला वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर रिंग रोड से शुरू होगा। यह वरुणा नदी के किनारे-किनारे चौकाघाट तक पहुंचेगा और वहां से आगे नमो घाट तक विकसित किया जाएगा। इस कॉरिडोर के बनने से शहर के अंदर वाहनों का दबाव कम होगा और पूर्वी तथा उत्तरी हिस्सों में आवागमन अधिक तेज और सुविधाजनक हो जाएगा।
गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर सिग्नेचर ब्रिज से होगा जुड़ा
दूसरा गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर प्रस्तावित सिग्नेचर ब्रिज से जुड़कर शहर की यातायात व्यवस्था को नया आयाम देगा। इस परियोजना के तहत श्री काशी विश्वनाथ धाम के ललिता घाट के सामने गंगा पार एक पाथवे भी बनाया जाएगा। योजना के अनुसार लोग अपनी गाड़ियां गंगा के उस पार पार्क करेंगे और पाथवे के माध्यम से पैदल श्री काशी विश्वनाथ धाम एवं घाटों तक पहुंच सकेंगे। इससे पुराने शहर में वाहनों का दबाव काफी हद तक कम होने की संभावना है।
पुरानी काशी में जाम की समस्या होगी कम
वाराणसी के पुराने शहर की सबसे बड़ी समस्या संकरी सड़कें और बढ़ता यातायात है। दोनों एलिवेटेड कॉरिडोर बनने के बाद भारी वाहनों और लंबी दूरी के ट्रैफिक को वैकल्पिक मार्ग मिलेगा। इससे शहर के भीतरी क्षेत्रों में जाम कम होगा और स्थानीय लोगों के साथ-साथ देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों एवं श्रद्धालुओं को भी राहत मिलेगी।
आधुनिक यातायात व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वाराणसी की संपूर्ण यातायात व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। दोनों कॉरिडोर के पूरा होने के बाद शहर की कनेक्टिविटी मजबूत होगी, यात्रा का समय घटेगा और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।

