जल संरक्षण के साथ किसानों की आय बढ़ाने में मददगार बनीं आधुनिक सिंचाई प्रणालियां
नौ वर्षों में ड्रिप इरिगेशन, पोर्टेबल स्प्रिंकलर और मिनी स्प्रिंकलर के लाभार्थियों की संख्या करीब साढ़े पांच गुना बढ़ी
सिंचाई का क्षेत्रफल भी 176.31 से बढ़कर 900.41 हेक्टेयर हुआ
आधुनिक सिंचाई प्रणालियों से 25 से 45 प्रतिशत तक पानी की बचत, किसानों को 65 से 90 प्रतिशत तक अनुदान
वाराणसी। जल संरक्षण और उन्नत खेती को बढ़ावा देने के साथ किसानों की आय बढ़ाने के लिए योगी सरकार आधुनिक सिंचाई प्रणालियों को लगातार प्रोत्साहित कर रही है। 'प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना' के तहत काशी के किसान ड्रिप इरिगेशन, पोर्टेबल स्प्रिंकलर और मिनी स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक तकनीकों को तेजी से अपना रहे हैं। इससे न केवल पानी की बचत हो रही है, बल्कि सिंचाई की लागत कम होने के साथ किसानों को बेहतर उत्पादन हासिल करने में भी मदद मिल रही है।
जिले में इन आधुनिक सिंचाई प्रणालियों के लाभार्थी किसानों की संख्या और सिंचाई का क्षेत्रफल पिछले नौ वर्षों में कई गुना बढ़ा है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में जहां इन तीनों प्रणालियों के लिए कुल 173 किसानों को 176.31 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई के लिए 41.54 लाख रुपये का अनुदान दिया गया था, वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 में लाभार्थियों की संख्या बढ़कर 948 और सिंचाई का क्षेत्रफल 900.41 हेक्टेयर हो गया है। इस अवधि में अनुदान की राशि भी बढ़कर 2,11,51,081 रुपये हो गई है।
जिला उद्यान अधिकारी सुभाष कुमार ने बताया कि आधुनिक सिंचाई प्रणालियों के प्रति किसानों को जागरूक करने के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। किसानों को कम पानी में अधिक क्षेत्र की सिंचाई और बेहतर उत्पादन के लिए इन तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
65 से 90 प्रतिशत तक मिलता है अनुदान
अपर उद्यान अधिकारी ज्योति कुमार सिंह ने बताया कि ड्रिप इरिगेशन, मिनी स्प्रिंकलर और पोर्टेबल स्प्रिंकलर की खरीद पर सरकार किसानों को 65 से 90 प्रतिशत तक अनुदान दे रही है। योजना के तहत विशेष रूप से बागवानी फसलों की खेती करने वाले किसानों को आधुनिक सिंचाई उपकरणों के इस्तेमाल के लिए जागरूक किया जा रहा है, ताकि वे कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकें। उन्होंने बताया कि ड्रिप इरिगेशन और मिनी स्प्रिंकलर के इस्तेमाल से 35 से 45 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है, जबकि पोर्टेबल स्प्रिंकलर से 25 से 30 प्रतिशत तक पानी बचाया जा सकता है।
2017-18 में सिंचाई उपकरण -हेक्टेयर-लाभार्थियों की संख्या-अनुदान की राशि
-ड्रिप इरिगेशन--8.60 ---4- ---5.54लाख
-पोर्टेबल स्प्रिंकलर --167.71 -169--36 लाख
-मिनी स्प्रिंकलर---0 -0 -- 0
2017 से योगी सरकार लागत को कम करने और अधिक उत्पादन प्राप्त करने के उद्देश्य से लगातार किसानों को इन तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। जिससे लाभार्थियों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है।
2025-26 में सिंचाई उपकरण -हेक्टेयर-लाभार्थियों की संख्या-अनुदान की राशि
-ड्रिप इरिगेशन--33.71 -44-- 21,24,127
-पोर्टेबल स्प्रिंकलर --702.80 -709 - 93,53,953
-मिनी स्प्रिंकलर---163.90 --195 -- 96,73,001
तीनों सिंचाई प्रणालियां कैसे करती हैं काम
ड्रिप सिंचाई में पानी बूंद-बूंद करके सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है। इससे पानी की बर्बादी कम होती है और पौधों को आवश्यकता के अनुसार पानी मिलता है।पोर्टेबल स्प्रिंकलर प्रणाली में पाइप और स्प्रिंकलर को खेत के अलग-अलग हिस्सों में आसानी से स्थानांतरित किया जा सकता है। इससे एक ही उपकरण के माध्यम से खेत के विभिन्न हिस्सों की सिंचाई की जा सकती है।

