वाराणसी के प्रमुख चौराहों पर लगेंगी मिस्ट गन, ठंहे फुहारे गर्मी से देंगे राहत, कूड़े के पहाड़ पर उगेगा जंगल
वाराणसी। शहर के प्रमुख चौराहों पर मिस्ट गन ठंडे फुहारे से गर्मी से राहत दिलाएंगे। वहीं कूड़े के पहाड़ पर जंगल उगाने की तैयारी है। नगर निगम ने भीषण गर्मी, प्रदूषण और शहरी समस्याओं से निपटने के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाओं की घोषणा की है। नगर निगम सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने इसके बाबत जानकारी दी।
नगर आयुक्त के अनुसार मैदागिन, गोदौलिया, लहुराबीर और वरुणा पुल जैसे व्यस्त चौराहों पर राहत सिस्टम स्थापित करने की योजना बनाई गई है। यह प्रणाली विशेष द्रव को सूक्ष्म कणों में बदलकर वातावरण में फैलाएगी, जिससे तापमान में 10 से 12 डिग्री सेल्सियस तक की कमी लाई जा सकेगी। उन्होंने बताया कि इस तकनीक का उपयोग गौशालाओं में शुरू भी कर दिया गया है।
शहर की पार्किंग समस्या को दूर करने के लिए नगर निगम ने मैदागिन क्षेत्र में 100 वाहनों की क्षमता वाली मल्टीलेवल पार्किंग बनाने का निर्णय लिया है। अस्सी की तर्ज पर बनने वाली इस पार्किंग से क्षेत्र में लगने वाले जाम से राहत मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही शहर के 15 प्रमुख चौराहों और तिराहों के सुंदरीकरण की योजना भी तैयार की गई है। इनमें कचहरी स्थित आंबेडकर चौराहा, लंका, तेलियाबाग और लहुराबीर जैसे क्षेत्र शामिल हैं। नगर निगम ने चरणबद्ध तरीके से शहर के सभी 276 पार्कों के कायाकल्प का भी प्रस्ताव तैयार किया है।
नगर आयुक्त ने बताया कि लहरतारा-चौकाघाट फ्लाईओवर के नीचे के क्षेत्र को पर्यटन हब के रूप में विकसित किया जाएगा। लगभग 13 करोड़ रुपये की लागत से यहां पाथ-वे, हरियाली और डॉरमेट्री बनाई जाएगी, जिसका कार्य आठ से नौ माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं करसड़ा स्थित डंपिंग ग्राउंड को भी नए स्वरूप में विकसित करने की योजना है। पिछले एक दशक से जमा 12.64 लाख मीट्रिक टन कचरे का बायोमाइनिंग तकनीक से निस्तारण किया जाएगा। इसके बाद खाली हुई 25 एकड़ जमीन पर जापानी ‘मियावाकी’ तकनीक से सघन जंगल विकसित किया जाएगा। नगर निगम का मानना है कि यह क्षेत्र भविष्य में शहर के ‘फेफड़े’ के रूप में काम करेगा।
इसके अलावा गर्मी से राहत देने के लिए नगर निगम ने सरकारी स्कूलों में ‘कूल रूफ कोटिंग’ योजना शुरू की है। जेपी मेहता इंटर कॉलेज से शुरू हुई इस योजना को 100 स्कूलों तक विस्तारित किया जाएगा। विशेष रिफ्लेक्टिव पेंट की मदद से स्कूलों की छतों को ठंडा रखा जाएगा, जिससे बच्चों को गर्मी से राहत मिल सके।

