मॉरीशस में जगेगी भोजपुरी की अलख, गिरमिटिया श्रमिकों के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को करेंगे याद 

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वाराणसी। भोजपुरी भाषा और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से मॉरीशस में मंगलवार से ‘भोजपुरी भाषा और सांस्कृतिक जागरूकता यात्रा’ शुरू होगी। विश्व भोजपुरी संघ और मॉरीशस में सक्रिय भारतीय मूल के संगठनों के सहयोग से आयोजित यह यात्रा 25 अक्टूबर तक चलेगी। यात्रा के दौरान भोजपुरी भाषा के संरक्षण और नई पीढ़ी को इससे जोड़ने के साथ मॉरीशस में गिरमिटिया श्रमिकों के इतिहास एवं सांस्कृतिक विरासत को भी याद किया जाएगा।

भारत और मॉरीशस के बीच भोजपुरी भाषा एवं संस्कृति के संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से यह आयोजन किया जा रहा है। यात्रा का नेतृत्व संस्था के अंतरराष्ट्रीय महासचिव डॉ. अर्पण नारायण तिवारी करेंगे। संस्था की ओर से अध्यक्ष प्रमुख (कांति संस्कृति) तथा मॉरीशस से जुड़े अन्य प्रतिनिधि भी अभियान में शामिल रहेंगे।

आयोजकों के मुताबिक अभियान का उद्देश्य प्रवासी भारतीयों के बीच भोजपुरी भाषा के संरक्षण और संवर्धन के साथ नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना है। इस दौरान मॉरीशस में भारतीय मूल के लोगों के बीच भोजपुरी भाषा की वर्तमान स्थिति और उसके संरक्षण को लेकर भी संवाद किया जाएगा।

गिरमिटिया श्रमिकों के इतिहास पर चर्चा
यात्रा के दौरान गिरमिटिया श्रमिकों के इतिहास और उनके संघर्षों पर भी चर्चा होगी। मॉरीशस में भारतीय मूल के लोगों के बीच विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें पारंपरिक भोजपुरी विवाह गीतों से लेकर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां शामिल रहेंगी। आयोजकों का कहना है कि भोजपुरी केवल भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और प्रवासी समाज की महत्वपूर्ण पहचान है। नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के लिए भाषा, लोकगीत, परंपराओं और गिरमिटिया इतिहास से परिचित कराया जाएगा। यात्रा के माध्यम से भारत-मॉरीशस के सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।

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