यूपी डायलॉग में गूंजा ‘विरासत से विकास’ का मंत्र, काशी में कानून-व्यवस्था, अर्थव्यवस्था और पर्यटन पर मंथन

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  • बीएचयू के प्रो. तेज प्रताप सिंह बोले- 2017 से 2026 के बीच बदली यूपी की तस्वीर, बेहतर कानून-व्यवस्था ने विकास के लिए तैयार किया आधार
  • यूपी डायलॉग-चैप्टर 4 में शिक्षाविदों और युवाओं ने किया संवाद, काशी की विरासत और बढ़ते पर्यटन पर भी हुई चर्चा

वाराणसी। उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को विकास से जोड़ने, कानून-व्यवस्था में आए बदलाव और पर्यटन के बढ़ते दायरे को लेकर रविवार को वाराणसी में ‘यूपी डायलॉग-चैप्टर 4’ का आयोजन किया गया। ‘फ्रेंड्स ऑफ यूपी’ पहल के तहत सिगरा-महमूरगंज रोड स्थित होटल पद्मिनी इंटरनेशनल में आयोजित कार्यक्रम की थीम ‘उत्तर प्रदेश: विरासत से विकास की ओर-सुदृढ़ कानून-व्यवस्था, बढ़ता पर्यटन’ रही। कार्यक्रम में शिक्षाविदों, विषय विशेषज्ञों और युवाओं ने प्रदेश की विकास यात्रा तथा भविष्य की संभावनाओं पर अपने विचार रखे।

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लखनऊ, प्रयागराज और नोएडा के बाद वाराणसी में इस संवाद श्रृंखला का चौथा अध्याय आयोजित किया गया। इससे पहले प्रयागराज में हुए चैप्टर-2 में 200 से अधिक युवाओं ने कानून-व्यवस्था, अर्थव्यवस्था, रोजगार और धार्मिक पर्यटन जैसे विषयों पर चर्चा की थी, जबकि नोएडा में आयोजित चैप्टर-3 में भी विकास और सामाजिक-आर्थिक बदलाव प्रमुख विषय रहे थे।

‘2017 से 2026 के बीच यूपी ने तय किया बड़ा सफर’
कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता और काशी हिंदू विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. तेज प्रताप सिंह ने वर्ष 2017 से 2026 के बीच उत्तर प्रदेश में हुए बदलावों पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि इस अवधि में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश को ‘उत्तम प्रदेश’ बनाने की दिशा में काम हुआ है।

प्रो. सिंह ने कहा कि एक समय उत्तर प्रदेश के सामने कानून-व्यवस्था बड़ी चुनौती थी। निवेशकों के बीच प्रदेश को लेकर आशंकाएं थीं और हिंसा, रंगदारी, अवैध वसूली तथा अपहरण जैसी घटनाएं विकास के माहौल को प्रभावित करती थीं। उनका कहना था कि कानून-व्यवस्था में बदलाव ने निवेश और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया।

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‘बुलडोजर मॉडल प्रभावी गवर्नेंस का प्रतीक’
प्रो. तेज प्रताप सिंह ने अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘बुलडोजर मॉडल’ का भी उल्लेख किया। उन्होंने इसे “इफेक्टिव गवर्नेंस का प्रतीक” बताते हुए कहा कि अपराध और अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई ने शासन की सख्त छवि बनाई है।

उन्होंने दावा किया कि बेहतर कानून-व्यवस्था का असर प्रदेश के दूसरे क्षेत्रों में भी दिखाई दिया है। उनके अनुसार उत्तर प्रदेश की जीएसडीपी में वृद्धि हुई, रोजगार के अवसर बढ़े और राज्य की वित्तीय स्थिति में भी बदलाव आया है। उन्होंने प्रदेश के रेवेन्यू सरप्लस राज्य बनने का जिक्र करते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था, निवेश और आर्थिक गतिविधियां एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। ये आर्थिक दावे कार्यक्रम में वक्ता द्वारा प्रस्तुत किए गए विचार हैं।

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विरासत के साथ विकास पर हुआ संवाद
कार्यक्रम में इस बात पर भी चर्चा हुई कि उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक विकास के साथ किस तरह जोड़ा जा सकता है। खास तौर पर वाराणसी के संदर्भ में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के विस्तार तथा उससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के लिए पैदा होने वाले अवसरों पर वक्ताओं ने विचार रखे।

यूपी डायलॉग की पिछली कड़ियों में भी धार्मिक पर्यटन को स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार से जोड़कर चर्चा की गई थी। प्रयागराज में आयोजित चैप्टर-2 में विशेषज्ञों ने धार्मिक-सांस्कृतिक स्थलों और पर्यटन के विस्तार को स्थानीय आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर देखा था। 

प्रो. मनीषा मेहरोत्रा ने भी रखे विचार
कार्यक्रम में बीएचयू के अर्थशास्त्र विभाग की प्रो. मनीषा मेहरोत्रा ने भी हिस्सा लिया। संवाद के दौरान अर्थव्यवस्था, विकास और उत्तर प्रदेश के सामने मौजूद संभावनाओं को लेकर चर्चा हुई। आयोजन का उद्देश्य केवल वक्ताओं के संबोधन तक सीमित न रहकर युवाओं और विशेषज्ञों के बीच संवाद का मंच उपलब्ध कराना रहा।

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‘फ्रेंड्स ऑफ यूपी’ की ओर से इससे पहले आयोजित कार्यक्रमों में भी युवाओं को विशेषज्ञों से सीधे सवाल करने और विकास, रोजगार, शिक्षा तथा शासन से जुड़े विषयों पर अपने विचार रखने का अवसर दिया गया है। 

सांस्कृतिक संध्या में प्रणव सिंह कान्हा की प्रस्तुति
संवाद सत्र के बाद कार्यक्रम में सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। इसमें गायक प्रणव सिंह कान्हा की विशेष प्रस्तुति रखी गई। आयोजकों के अनुसार यूपी डायलॉग श्रृंखला का उद्देश्य युवाओं, शिक्षाविदों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा, नीतियों और भविष्य से जुड़े विषयों पर संवाद को आगे बढ़ाना है।

वाराणसी के आयोजन के साथ यह चर्चा काशी की सांस्कृतिक पहचान, पर्यटन और प्रदेश के बदलते आर्थिक-सामाजिक परिदृश्य पर केंद्रित रही। कार्यक्रम में वक्ताओं ने जहां पिछले वर्षों में आए बदलावों को रेखांकित किया, वहीं युवाओं की भागीदारी और आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश के विकास की संभावनाओं पर भी विचार साझा किए।

देखें वीडियो 

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