मालिनी अवस्थी की सुर साधना, शिवनाथ मिश्र के सितार का जादू, नवरात्र में विश्वनाथ दरबार में गीत-संगीत का अद्भुत संगम 

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वाराणसी। चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन शुक्रवार की शाम श्री काशी विश्वनाथ धाम में भक्ति, संगीत और नृत्य का ऐसा अलौकिक संगम देखने को मिला, जिसने पूरे परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। शिवार्चनम् मंच पर आयोजित भव्य सांस्कृतिक संध्या में देश के प्रतिष्ठित कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

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कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, जहां उपस्थित अतिथियों और मंदिर न्यास के अधिकारियों ने मां भगवती और बाबा विश्वनाथ का स्मरण कर मंगलकामनाएं कीं। इसके बाद मंच पर शुरू हुआ सुरों और भावों का अद्भुत सफर।

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सबसे पहले पद्मश्री मालिनी अवस्थी की भक्ति गायकी ने माहौल को भक्तिरस में डूबो दिया। उनके सुरों ने ऐसा समां बांधा कि पूरा धाम जयघोष से गूंज उठा। इसके बाद प्रसिद्ध नृत्यांगना रमा वैद्यनाथन ने भरतनाट्यम के माध्यम से देवी आराधना की भावपूर्ण प्रस्तुति दी, जिसने दर्शकों को आध्यात्मिक अनुभूति से भर दिया।

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संध्या का खास आकर्षण रहा “सितार त्रिवेणी”, जिसमें पद्मश्री पंडित शिवनाथ मिश्र के साथ देवव्रत मिश्र और कृष्णा मिश्र ने अपनी सामूहिक प्रस्तुति से शास्त्रीय संगीत की अद्भुत छटा बिखेरी। तीनों कलाकारों की जुगलबंदी ने ऐसा समां बांधा कि दर्शक देर तक तालियों से उनका उत्साह बढ़ाते रहे।

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पूरे कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालु भावविभोर होकर कलाकारों की प्रस्तुतियों में डूबे रहे। नवरात्रि के इस आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूती दी, बल्कि भारतीय संस्कृति और शास्त्रीय कला की समृद्ध परंपरा को भी सजीव रूप में प्रस्तुत किया।

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बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों और बाहर से आए श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया। मंदिर प्रशासन द्वारा सुरक्षा, स्वच्छता और व्यवस्थाओं का बेहतर प्रबंधन किया गया, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से सम्पन्न हुआ।

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