मां मणिकर्णिका दो दिन भक्तों को देंगी दर्शन, साल में सिर्फ तीन दिन ही होता है दर्शन
वाराणसी। मणिकर्णिका घाट पर स्थित पौराणिक चक्रपुष्करिणी कुंड के वार्षिक श्रृंगार और दर्शन का आयोजन शक्रवार से दो दिनों तक किया जाएगा। इस विशेष अवसर पर श्रद्धालुओं को मां मणिकर्णिका के दिव्य स्वरूप के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होगा।
काशी तीर्थ पुरोहित सभा के अध्यक्ष व मणिकर्णिका तीर्थ के प्रधान पुरोहित पं. मनीष नंदन मिश्र ने बताया कि वर्ष में केवल तीन बार-रंगभरी एकादशी, अक्षय तृतीया और तृतीया तिथि-पर ही मणिकर्णिका कुंड को जलरहित कर श्रद्धालुओं को दर्शन कराया जाता है। इसी परंपरा के तहत इस वर्ष भी आयोजन किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि शुक्रवार प्रातः मां मणिकर्णिका का विशेष श्रृंगार, षोडशोपचार पूजन और गुलाल अर्पण के साथ महाआरती सम्पन्न होगी। इसके पश्चात रात्रि में कुंड से जल निकासी का कार्य किया जाएगा। दूसरे दिन शनिवार दोपहर एक बजे तक उत्तर भारतीय रीति-रिवाज से दर्शन की व्यवस्था रहेगी।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सृष्टि निर्माण के समय भगवान विष्णु ने यहां तपस्या की थी और भगवान शिव के कर्ण से गिरी मणि के कारण यह स्थल ‘मणिकर्णिका’ नाम से विख्यात हुआ। ऐसी आस्था है कि यहां स्नान और दर्शन से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
दो दिवसीय इस आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है और बड़ी संख्या में भक्तों के पहुंचने की संभावना है। प्रशासन और तीर्थ पुरोहितों द्वारा समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।

