लोलार्क षष्ठी स्नान : आधी रात से श्रद्धालु कुंड में लगाएंगे आस्था की डुबकी, संतान प्राप्ति की कामना लेकर 10 से अधिक राज्यों से पहुंचे दंपती

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एक किलोमीटर लंबी कतार, एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान

वाराणसी। सूर्य उपासना के महापर्व लोलार्क षष्ठी पर गुरुवार को भदैनी स्थित प्राचीन लोलार्क कुंड में आस्था का सैलाब उमड़ेगा। संतान प्राप्ति की कामना लेकर देश के 10 से अधिक राज्यों से दंपती काशी पहुंच चुके हैं। बुधवार मध्यरात्रि के बाद कुंड में स्नान शुरू होगा, जो गुरुवार देर रात तक चलने की संभावना है। पर्व को लेकर मंगलवार से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। देर रात तक सोनारपुरा से अस्सी मार्ग के बीच बैरिकेडिंग में करीब एक किलोमीटर लंबी कतार लग गई।

लोलार्क षष्ठी काशी के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में शामिल है और इसे लक्खा मेले का दर्जा प्राप्त है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन और पुलिस ने व्यापक इंतजाम किए हैं। सोनारपुरा और अस्सी की ओर करीब ढाई किलोमीटर क्षेत्र में बैरिकेडिंग की गई है। लोलार्क कुंड से पांडेय हवेली तक दोहरी बैरिकेडिंग कराई गई है।

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आधी रात के बाद शुरू होगा स्नान
लोलार्केश्वर महादेव के महंत परिवार के पं. अजय शंकर पांडेय के अनुसार, बुधवार रात 11 बजे लोलार्केश्वर महादेव का रुद्राभिषेक और षोडशोपचार पूजन होगा। इसके बाद रात 12 बजे के बाद श्रद्धालुओं के कुंड में स्नान का क्रम शुरू हो जाएगा। पूर्वांचल के अलावा दिल्ली, बिहार, झारखंड, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों से श्रद्धालु पहुंचेंगे।

सुबह 6:31 से 10:26 बजे तक विशेष मुहूर्त
पं. अजय शंकर पांडेय ने बताया कि लोलार्क षष्ठी पर सुबह 6:31 से 10:26 बजे तक स्नान-पूजन का विशेष मुहूर्त माना गया है। इस दौरान सर्वार्थ सिद्धि योग भी रहेगा। षष्ठी तिथि 16 सितंबर की सुबह 8:55 बजे से 17 सितंबर की सुबह 10:26 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार पर्व 17 सितंबर को मनाया जाएगा।

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धूप से बचाव के लिए छांव की व्यवस्था
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बैरिकेडिंग के ऊपर कपड़े की छांव लगाई गई है। भीड़ को व्यवस्थित रखने के लिए जिग-जैग बैरिकेडिंग की गई है। प्रवेश और निकासी के लिए अलग-अलग द्वार बनाए गए हैं। प्रशासन के अनुसार पर्व पर एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है।

संतान सुख की कामना से जुड़ी मान्यता
धार्मिक मान्यता के अनुसार लोलार्क षष्ठी पर पति-पत्नी के कुंड में स्नान करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के चलते बड़ी संख्या में दंपती यहां पहुंचते हैं। जिनकी मनोकामना पूरी हो चुकी है, वे भी मन्नत पूरी करने के लिए दोबारा कुंड पहुंचते हैं।

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मान्यता है कि भाद्रपद शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर सूर्यदेव के रथ का पहिया यहां गिरा था, इसलिए इसे सूर्य का कुंड भी कहा जाता है। पर्व से पहले ही उमड़ी भीड़ को देखते हुए पुलिस-प्रशासन के सामने श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्नान कराने और भीड़ नियंत्रण की बड़ी चुनौती रहेगी।

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