काशी की विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती : दीपावली पर 1100 दीपों से लिखा शुभ दीपावली, दशाश्वमेध घाट पर 100 दिन बाद मूल स्थान पर शुरू हुई आरती 

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वाराणसी। दीपावली के पावन पर्व पर सोमवार की संध्या काशी के विश्वप्रसिद्ध दशाश्वमेध घाट पर मां गंगा की आरती भव्य रूप से संपन्न हुई। 100 दिनों के लंबे अंतराल के बाद पहली बार आरती अपने मूल स्थल पर आयोजित की गई, जिससे घाट का वातावरण भक्तिभाव और उत्साह से भर उठा। इस दौरान 1100 दीपों से शुभ दीपावली लिखकर मां गंगा को अर्पित किया गया। वहीं सुख-समृद्धि और शांति के लिए प्रार्थना की गई। 

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आरती के अवसर पर घाट को दीपों से सजाया गया। 1100 दीपों से “शुभ दीपावली” लिखकर मां गंगा से देश की सुख-समृद्धि की कामना की गई। आरती के दौरान शंखनाद, घंटे-घड़ियाल और डमरू की गूंज से पूरा घाट मंत्रमुग्ध कर देने वाला दृश्य प्रस्तुत कर रहा था। श्रद्धालु “हर हर गंगे” और “जय मां गंगे” के जयकारों के साथ भक्तिभाव में लीन हो गए।

11 जुलाई से गंगा के बढ़े जलस्तर के कारण आरती को छत पर आयोजित किया जा रहा था, लेकिन जलस्तर सामान्य होने के बाद दीपावली के दिन से इसे फिर यथास्थान प्रारंभ किया गया। इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने के लिए घाट पर देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु और पर्यटक उपस्थित रहे।

आरती स्थल पर दीपों की रोशनी और पुष्प सज्जा ने घाट को दिव्य आभा से आलोकित कर दिया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने दीप प्रवाहित कर मां गंगा से मोक्ष, शांति और समृद्धि की कामना की। मां गंगा सेवा समिति के सदस्यों ने बताया कि अब से प्रतिदिन सायं दशाश्वमेध घाट पर नियमित आरती संपन्न होगी।

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