काशी बनेगी स्मार्ट मोबिलिटी का वैश्विक मॉडल, भीड़ प्रबंधन और पैदल आवागमन की व्यवस्था होगी हाईटेक, सस्टेनेबल सिटीज चैलेंज के वितेजाओं की हुई घोषणा 

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वाराणसी। श्री काशी विश्वनाथ धाम और घाटों पर प्रतिदिन उमड़ने वाले लाखों श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों की आवाजाही को अधिक सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। नगर निगम एवं स्मार्ट सिटी द्वारा टोयोटा मोबिलिटी फाउंडेशन (TMF), चैलेंज वर्क्स और वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (WRI) इंडिया के सहयोग से संचालित 'सस्टेनेबल सिटीज चैलेंज (SCC) वाराणसी' के विजेताओं की रविवार को घोषणा की गई। इस अवसर पर नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री एके शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

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इस प्रतियोगिता में CITYDATA.AI और Nippon Koei द्वारा विकसित 'सिटीफ्लो (CityFlow)' तथा The Urbanizer द्वारा विकसित 'जनयात्रा (Janjatra)' को विजेता घोषित किया गया। दोनों टीमों को वाराणसी में अपने समाधान बड़े स्तर पर लागू करने के लिए वित्तीय सहायता, तकनीकी सहयोग और विशेषज्ञ परामर्श प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा VOGIC AI के 'बेहतरवे (Behtarway)' और प्रमेय कंसल्टिंग के 'नयीचाल (Nayichaal)' को शहर की समावेशी और आधुनिक मोबिलिटी व्यवस्था में योगदान के लिए 'मानद उल्लेख (Honorable Mentions)' से सम्मानित किया गया।

इन सभी समाधानों का उद्देश्य काशी के विरासत क्षेत्रों में पैदल यात्रियों की आवाजाही को अधिक सुरक्षित, सहज और प्रभावी बनाना है। आधुनिक तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), बिग डेटा, डिजिटल नेविगेशन और मानव-केंद्रित शहरी डिजाइन का उपयोग कर भीड़ प्रबंधन को नई दिशा देने का प्रयास किया जाएगा।

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'सिटीफ्लो' अत्याधुनिक बिग डेटा, कंप्यूटर विज़न और जेनरेटिव एआई तकनीक का उपयोग कर रियल-टाइम में भीड़ की गतिविधियों का विश्लेषण करेगा। यह प्रणाली काशी इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को भीड़भाड़ वाले स्थानों की तुरंत पहचान कर आवश्यक कदम उठाने में सहायता करेगी, जिससे आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सकेगा।

वहीं 'जनयात्रा' परियोजना रंग-आधारित मार्गदर्शन (कलर-कोडेड वेफाइंडिंग), डिजिटल साइनेज और सामरिक शहरी हस्तक्षेपों के माध्यम से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सही दिशा देने के साथ-साथ अधिक भीड़ वाले पैदल मार्गों पर दबाव कम करेगी। 'बेहतरवे' एक एआई आधारित हाइपरलोकल पैदल यात्री नेविगेशन प्लेटफॉर्म है, जबकि 'नयीचाल' विशेष रूप से दिव्यांगजनों के लिए सुगम और सुविधाजनक आवागमन सुनिश्चित करने पर केंद्रित है, जिससे धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक उनकी पहुंच और आसान हो सके।

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इन समाधानों का चयन दो वर्षों तक चली चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया के बाद किया गया। इस दौरान देश-विदेश के नवाचार विशेषज्ञों, प्रशासनिक अधिकारियों, मोबिलिटी विशेषज्ञों तथा स्थानीय हितधारकों ने मिलकर काशी की जटिल भीड़ प्रबंधन और पैदल यात्री समस्याओं का अध्ययन किया तथा व्यावहारिक एवं दीर्घकालिक समाधान विकसित किए।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए. के. शर्मा ने कहा कि काशी भारत की आध्यात्मिक चेतना का केंद्र होने के साथ-साथ वैश्विक पर्यटन का भी प्रमुख आकर्षण है। यहां प्रतिवर्ष करोड़ों श्रद्धालु पहुंचते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षित और सुगम आवाजाही सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि काशी की सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण रखते हुए आधुनिक तकनीक आधारित मोबिलिटी समाधान अपनाना समय की आवश्यकता है और यह पहल वाराणसी को स्मार्ट, सुरक्षित तथा विश्वस्तरीय शहर बनाने में मील का पत्थर साबित होगी।

मंडलायुक्त एवं वाराणसी स्मार्ट सिटी के अध्यक्ष एस. राजलिंगम ने कहा कि डेटा आधारित तकनीक, आधुनिक वेफाइंडिंग प्रणाली और मानव-केंद्रित डिजाइन भविष्य के शहरों की आवश्यकता हैं। इन समाधानों से वाराणसी के ऐतिहासिक क्षेत्रों में भीड़ प्रबंधन अधिक प्रभावी होगा और श्रद्धालुओं व पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिलेगा।

नगर आयुक्त एवं वाराणसी स्मार्ट सिटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हिमांशु नागपाल ने कहा कि वाराणसी यह साबित कर रहा है कि ऐतिहासिक शहर भी आधुनिक तकनीक की सहायता से वर्तमान समय की मोबिलिटी चुनौतियों का सफल समाधान खोज सकते हैं। उन्होंने बताया कि चयनित परियोजनाएं सुरक्षा, सुगमता, डिजिटल प्रबंधन और सार्वजनिक स्थानों की गुणवत्ता को नई ऊंचाई देंगी।

टोयोटा मोबिलिटी फाउंडेशन के कार्यकारी कार्यक्रम निदेशक प्रसन्ना गणेश ने कहा कि विजेता टीमों ने ऐतिहासिक शहर की जटिल चुनौतियों को नवाचार के अवसर में बदलने का उत्कृष्ट कार्य किया है। वहीं चैलेंज वर्क्स की निदेशक कैथी नोथस्टाइन ने कहा कि वाराणसी दुनिया के सामने यह उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है कि किस प्रकार आधुनिक तकनीक और मानव-केंद्रित शहरी डिजाइन को सांस्कृतिक विरासत के साथ सफलतापूर्वक जोड़ा जा सकता है।

इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन के बाद उम्मीद है कि श्री काशी विश्वनाथ धाम, घाटों और अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों को अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और व्यवस्थित आवागमन का अनुभव मिलेगा तथा वाराणसी स्मार्ट एवं सतत शहरी विकास का एक वैश्विक मॉडल बनकर उभरेगा।

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