काशी-तमिल संगमम 4.0 : तमिलनाडु से काशी तक ऋषि अगस्त्य कार रैली, तेनकाशी से शुरू होकर काशी में होगी समाप्त
वाराणसी। तमिलनाडु और काशी के प्राचीन सभ्यतागत रिश्तों को नई ऊर्जा देने के उद्देश्य से केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ‘ऋषि अगस्त्य वाहन अभियान’ (SAVE) नामक ऐतिहासिक कार रैली का आयोजन कर रहा है। काशी तमिल संगमम (केटीएस) 4.0 के प्रमुख आकर्षणों में शामिल यह रैली 2 दिसंबर 2025 को तमिलनाडु के तेनकाशी से शुभारंभ होगी और 10 दिसंबर को वाराणसी में भव्य समापन के साथ अपनी यात्रा पूरी करेगी।

करीब 15 से 20 कारों के काफिले में लगभग 100 प्रतिभागी शामिल होंगे। यह दल कुल 2,460 किलोमीटर की दूरी तय करेगा, जिसके माध्यम से दक्षिण भारत और उत्तर भारत की सांस्कृतिक विरासत की एकता को सशक्त संदेश दिया जाएगा। यह रैली पांडियन शासक श्री आदि वीर पराक्रम पांडियन को समर्पित है, जिन्होंने तमिलनाडु से काशी तक की अपनी ऐतिहासिक यात्रा के दौरान भारतीय संस्कृति की सामूहिक पहचान को मजबूत किया था। कहा जाता है कि उन्होंने भगवान शिव के एक मंदिर का निर्माण कराया था, जिसे विश्वनाथ मंदिर के नाम से जाना जाता है। इसी पवित्र स्थल को उन्होंने ‘तेनकाशी’ यानी ‘दक्षिण काशी’ नाम दिया, जो सांस्कृतिक समानताओं का प्रतीक बन गया।
रैली के दौरान प्रतिभागी दक्षिण भारत के चेर, चोल, पांड्य, पल्लव और चालुक्य वंशों समेत विजयनगर साम्राज्य की ऐतिहासिक धरोहरों और उनसे जुड़े सांस्कृतिक प्रभावों को उजागर करेंगे। इसके अलावा शास्त्रीय तमिल साहित्य, सिद्ध चिकित्सा पद्धति और साझा भारतीय विरासत को आम जनता तक पहुँचाने की योजनाएँ भी इस अभियान का हिस्सा हैं।
यात्रा के दौरान एक विशेष रूप से तैयार वाहन भी काफिले के साथ चलेगा, जिसमें एलईडी डिस्प्ले के माध्यम से विभिन्न भारतीय भाषाओं में शास्त्रीय ग्रंथों, ऐतिहासिक स्थलों और प्राचीन परंपराओं से संबंधित सामग्री प्रदर्शित की जाएगी। रास्ते में तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के स्थानीय लोग रैली के प्रतिभागियों का उत्साहपूर्वक स्वागत करेंगे।
इस वर्ष काशी तमिल संगमम 4.0 का केंद्रीय थीम “तमिल सीखें - तमिल करकलम” रखा गया है। इसका उद्देश्य तमिल भाषा के ज्ञान का प्रसार करना, शास्त्रीय साहित्य की समझ को व्यापक बनाना और पूरे भारत में सांस्कृतिक एकात्मता की भावना को सुदृढ़ करना है।
इस आयोजन का नेतृत्व केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय कर रहा है, जबकि संस्कृति मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, पर्यटन मंत्रालय, कपड़ा मंत्रालय, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, एमएसएमई मंत्रालय, कौशल विकास मंत्रालय, आईआरसीटीसी और उत्तर प्रदेश सरकार इसमें सहयोग कर रहे हैं। इस पूरे कार्यक्रम के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी आईआईटी मद्रास और बीएचयू को सौंपी गई है।

