सोलर रूफ टॉप स्थापना में काशी देश में दसवें स्थान पर
- कई बड़े महानगरों को पीछे छोड़ते हुए रूफटॉप सोलर पैनल स्थापना में काशी ने पेश की मिसाल
- बनारस में 39, 018 इंस्टॉलेशन पूरे, 1,32,096.31 किलोवाट की क्षमता स्थापित
- प्रतिदिन 6,60,482 यूनिट बिजली का हो रहा उत्पादन, लगभग 39.6 लाख रुपये की हो रही बचत
- 251.49 करोड़ रुपये की सब्सिडी भी की जा चुकी वितरित
- वार्षिक 1.58 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जन में आएगी कमी
- 30,000 लोगों को प्रत्यक्ष और 3 लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा
वाराणसी। हरित ऊर्जा के क्षेत्र में भी काशी अब नई पहचान बना रही है। परंपरा और आधुनिकता के अद्भुत संगम वाली यह प्राचीन नगरी प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत तेजी से हरित ऊर्जा अपनाने वाले शहरों में शामिल हो गई है। वाराणसी ने कई बड़े महानगरों को पीछे छोड़ते हुए रूफटॉप सोलर पैनल स्थापना में देश भर में दसवां स्थान प्राप्त किया है।वाराणसी में अब तक 39,018 रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं।
मुख्य विकास अधिकारी प्रखर कुमार सिंह ने बताया कि इस योजना के तहत कुल 62,964 आवेदन प्राप्त हुए, इनमें से करीब 39,018 इंस्टॉलेशन पूरे हो चुके, जिसमें सभी संबंधित योजनाएं शामिल हैं। जिले में अब तक लगभग 1,32,096.31 किलोवाट क्षमता स्थापित की जा चुकी है, जिससे वाराणसी हरित ऊर्जा के क्षेत्र में प्रदेश के अग्रणी जिलों में शामिल हो रहा है। वाराणसी कई माह से लखनऊ के बाद प्रदेश में लगातार दूसरे नंबर पर है।
प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना वाराणसी में विकास, बचत, रोजगार और पर्यावरण संरक्षण का सशक्त माध्यम बनकर उभर रही है। मोदी -योगी की दूरदर्शी नीति और राज्य सरकार की मजबूत कार्यशैली ने इस योजना को धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू करते हुए इसे जनहित की सफल योजना बना दिया है।
सब्सिडी से राहत
यूपीनेडा के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी शशि गुप्ता ने बताया कि योजना के तहत अब तक लगभग 33,332 उपभोक्ताओं को 251.49 करोड़ की सब्सिडी राशि वितरित की गई है। घरों की छतों पर सोलर पैनल लगने से बिजली बिल में भारी कमी आई है और अनेक परिवार लगभग मुफ्त बिजली का लाभ ले रहे हैं।
सौर संयंत्रों से हो रही सेविंग
परियोजना अधिकारी ने बताया कि वाराणसी में स्थापित सौर संयंत्रों से प्रतिदिन लगभग 6,60,482 यूनिट बिजली का उत्पादन हो रहा है। जिससे प्रतिदिन लगभग 39.6 लाख रुपये की बचत हो रही है। यही बचत वार्षिक स्तर पर लगभग 144.65 करोड़ रुपये तक है।
आर्थिक लाभ ,पर्यावरण और भूमि संरक्षण
यह योजना केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी बड़ी भूमिका निभा रही है। वार्षिक स्तर पर लगभग 1.58 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी। इससे वाराणसी को स्वच्छ, हरित और प्रदूषण मुक्त शहर बनाने में मदद मिल रही है। इसके अतिरिक्त योजना से लगभग 660 एकड़ कृषि भूमि संरक्षण का लाभ भी हुआ है, क्योंकि रूफटॉप सोलर मॉडल के माध्यम से अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता कम हुई है। इससे किसानों की भूमि सुरक्षित रहते हुए ऊर्जा उत्पादन संभव हो सका है।
रोजगार सृजन में सहयोग
रोजगार के क्षेत्र में भी योजना ने नई संभावनाएं पैदा की हैं। जिले में 310 वेंडर सक्रिय हैं, जबकि लगभग 30,000 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार और 3 लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है। सोलर उपकरण, इंस्टॉलेशन, मेंटेनेंस, परिवहन और तकनीकी सेवाओं से जुड़े हजारों युवाओं को काम मिला है।
वर्जन
काशी की जनता और विभाग की मेहनत से वाराणसी ने देश में दसवां स्थान बनाया है। वाराणसी प्रदेश में कई महीनों से लगातार रूफ टॉप सोलर स्थापना में नंबर दो बना हुआ है। वाराणसी जल्द ही देश की रैंकिंग में और सुधार करेगा।
प्रखर कुमार सिंह, मुख्य विकास अधिकारी, वाराणसी

